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जयपुर।

दिसंबर में गठित हुई राजस्थान कि प्रदेश सरकार के द्वारा भले ही अनेक बेरिकेट्स लगाकर किसानों का कर्जमाफ करने का ऐलान किया गया हो, लेकिन असल समस्याओं पर ध्यान नहीं देने के कारण एक बार फिर से राज्य का किसान आंदोलन की राह पर है।

राजस्थान में किसान एक बार फिर से अंदोलन की राह पर हैं। बुधवार को सीकर जिले में किसानों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय पर अनिश्चितकालीन पड़ाव डाला दिया था, जो बदस्तूर जारी है।

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सीकर जिले और उसके आस -पास के इलाके के अन्नदाता बड़ी संख्या में बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसान अपने साथ प्याज का एक-एक बोरा भी लाए, ताकि खाने के दौरान उसको काम में लिया जा सके और बदतर होती हालात से भी सरकार को रूबरू करवा सकें।

इसके साथ ही अपने खाने – पीने का इंतजाम भी करके आये। इस किसान महापड़ाव में पुरुष अन्नदाताओं के साथ साथ महिलाएं भी बडी संख्या में है।

किसान खुद ही खाना पका रहे हैं।आपको बता दें कि प्रदेश के किसान पिछले काफी समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गांव और ब्लॉक स्तर पर धरने-प्रदर्शन कर रहे हैं।

अभी अभी यहां पर किसान पहुंच रहे हैं, देर रात तक किसान आते रहे। सभी मौके पर धरने में शामिल हुए सभी अन्नदाताओं ने पूरी रात वहीं जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर बिताई। इस दौरान अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम, पूर्व विधायक पेमाराम सहित हजारों की तादात में किसान मौजूद रहे। इस अंदोलन के लिए जिलेभर के किसान रसीदपुरा और भादरा से पैदल और ट्रेक्टरों से सीकर कलेक्ट्रेट पहुंचे।

किसानों के इस अंदोलन को भरतीय किसान यूनियन, अखिल भरतीय खेतिहर मज़दूर किसान का समर्थन मिला है। इसके अलावा महापड़ाव में RLP के संयोजक और खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल सहित आधा दर्जन से ज्यादा संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

आखिर किसान प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?

इससे पहले साल 2011 और 2015 में राज्य सरकार ने प्याज की खरीद की थी। लेकिन बाकी समय नहीं कि गई, जिसके चलते किसानों का प्याज़ बर्बाद हो गया। किसानों का कहना है कि राज्य सरकार अभी इस बार क्यों नहीं खरीद रही है ?

एक एकड़ में 7 से 8 हज़ार रूपये लागत आती है

किसानों का कहना है कि प्रदेश की सरकार उनके प्याज को 10 रुपए किलो खरीदकर इसे प्रदेशभर की राशन की दुकानों पर आम जनता को बेचें। प्याज की खेती में उन्हें 7 रुपए तक खर्च आता है। मंडी में प्याज के बहुत कम दाम मिल रहे हैं। किसान 2 – 3 रूपये किलोग्राम में अपनी प्याज बेचने को मज़बूर हैं। इस बेचान से तो किसानों की लागत भी नहीं निकल रही।

नासिक के बाद सीकर, चूरू और झुंझुनू जिले प्याज के पैदावार की लिहाज से देश का बड़ा इलाका है। इसके लिए 15 साल पहले रशीदपुरा में प्याज़ मंडी बनाने की घोषणा हुई थी, जो एक साल पहले तैयार हो चुकी है, लेकिन उसे चालू नहीं किया गया। इसके साथ ही हाल ही में की गई कर्जमाफी में हुए घोटाले व बेरोजगारी भत्ता को लेकर सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ भी भारी गुस्सा है।

दूध का भी दाम किसानों को नहीं मिल रहा है

पिछले साल किसानों को 25 से 28 रूपये लीटर तक का दाम मिलता था, लेकिन आज किसान दूध को 20 रूपये लीटर में बेचने को मज़बूर है। जबकि वही दूध क्रीम निकालकर 50 रूपये की दर से शहरों में आमजन को बेचा जा रहा है।

अन्नदाता की मांग है की जिस दर पर आमजन को दूध बेचा जा रहा है, उसका 70 % किसानों को मिलान चाहिए। बाकि 30% पैकजिंग वगेहर के लिए खर्च किया जाए। 11 सूत्रीय मांग पत्र को किसान प्रदर्शन कर रहे हैं।

अखिल भरतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राजस्थान के पूर्व विधायक अमराराम ने “नेशनल दुनिया” से बात करते हुए बताया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार, दोनों ने ही धोखा दिया है।

यहां तक जिन फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार ने जारी किया, उसे भी नहीं खरीद रही है। मोदी सरकार ने खुद 7 जुलाई को बाजार का समर्थन मूल्य 1900 रूपये घोषणा की थी, लेकिन सच्च यह कि एक किलो भी बाजार इन दरों पर नहीं खरीदा गया।

पिछले 20 साल में खेती की लागत बढ़ी है, जबकि दामों में लगातर काम हो रहे है। अमराराम ने पूरे हालत को सरकार और पूंजीपतियों की साज़िश करार देते हुए कहा कि ये सब नहीं चाहते हैं कि किसान बचे रहें। किसान को घाटे का सौदा बनाया जा रहा है, जिससे अन्नदाता खेती से दूर हो जाए और सरकार इनकी ज़मीन पूंजीपतियों को दे सकें

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