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आज़ादी का जश्न 15 अगस्त को इस बार भले हो धारा 370, अनुच्छेद 35A हटने के कारण अधिक आनंदाई हो गया हो, किन्तु भारतीय जनता पार्टी राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी उसके बाद ही होगी।

बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी प्रदेश इकाई की तरफ से अध्यक्ष के नाम भेजे जा चुके हैं, और जल्दी ही केंद्रीय आलाकमान एक नाम के ऊपर मुहर लगाकर अध्यक्ष के नाम के नाम का ऐलान कर देगा।

दिल्ली भाजपा के जानकार सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ होने के बावजूद विधासभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की उम्र अधिक होने की वजह से उनके नाम पर विचार नहीं किया जा रहा है।

आज़ादी के जश्न के बाद बीजेपी में अध्यक्ष की ताजपोशी 1

दूसरे नम्बर पर राजेंद्र राठौड़ के नाम चर्चा की गई, लेकिन उनके पास उपनेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी होने और वसुंधरा राजे के करीबी माने जाने के नाते उन्हें इस पद के लिए आगे नहीं किया जा रहा है।

सतीश पूनिया, राजेंद्र सिंह राठौड़ और गुलाबचंद कटारिया के अलावा राजस्थान से राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का नाम अध्यक्ष पद की दौड़ में था, लेकिन गजेंद्र सिंह शेखावत के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनने के बाद उनका नाम पिछड़ गया।

भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग फिट बैठने सतीश पूनिया पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो. सांवरलाल जाट के निधन के बाद राज्य की जातीय सियासत के लिहाज से भी सबसे आगे माने जाते हैं।

ऐसे में विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव अभियान समिति के सह संयोजक के तौर पर सफलतापूर्वक जिम्मेदारी निभाने वाले भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता सतीश पूनिया इस दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं, जो वर्तमान में सदस्यता अभियान के प्रदेश संयोजक भी हैं।

जानकारी मिली है कि तत्कालीन अध्यक्ष मदनलाल सैनी के 24 जून 2019 को निधन के कारण रिक्त अध्यक्ष पद के लिए आमेर से विधायक सतीश पूनिया का नाम प्रदेश इकाई की तरफ से भेज दिया गया है।

आपको बता दें कि राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का धड़ा कमजोर होने के साथ ही राज्य इकाई में आरएसएस का दबदबा होने लगा। यह भी बड़ा कारण है कि आरएसएस के बेहद करीबी माने जाने वाले सतीश पूनिया का नाम अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान विश्वविद्यालय में अपने उच्च शिक्षण के अध्ययन के समय से ही सतीश पूनिया लगातार एबीवीपी से जुड़े रहे हैं। उसके बाद उन्होंने आरएसएस जॉइन कर लिया।

अध्ययन के शौकीन सतीश पूनिया ने बीते 20 साल के दौरान संगठनात्मक रूप से विभिन्न पदों पर रहते हुए पार्टी में रहकर संगठन को मजबूत करने का काम किया।

लगातार 14 साल तक भारतीय जनता पार्टी के महामंत्री सतीश पूनिया को करीब 2 साल पहले ही पार्टी ने वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर नियुक्त किया था।

लम्बे अनुभव और संगठन कौशल के दम पर सतीश पूनिया को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी आलाकमान सौंप सकता है।

भाजपा सूत्रों का दावा है कि 15 अगस्त 2019 के बाद कभी भी केंद्रीय आलाकमान की तरफ से अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी जाएगी।