Advocate Vikram Singh Arya Sikar
Advocate Vikram Singh Arya from Sikar

Ramgopal Jat.
वैसे तो तकरीबन हर सियासी दन में कई एडवोकेट विधायक, सांसद और मंत्री जैसे बड़े पदों पर हैं, जो देश के नामी लोगों में भी शुमार हैं। अन्य दलों के साथ कांग्रेस पार्टी में भी हर 5 साल में होने वाले चुनाव के वक्त सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई वरिष्ठ वकील टिकट की कतार में खड़े नजर आते हैं।सुप्रीम कोर्ट के ही एक और बड़े ख्यातनाम वकील ने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर सीकर लोकसभा सीट से दावेदारी जताई है।

अगले लोकसभा चुनाव को लेकर राजस्थान में भी देश की तरह हर संसदीय सीट पर नाम नजर आने लगे हैं। सीकर लोकसभा सीट से भी करीब आधा दर्जन ऐसे नाम हैं, जो टिकट के लिए दावेदारी जता रहे हैं।

इनके बीच एक और मजबूत नाम सामने आया है। नाम है सुप्रीम कोर्ट के ख्यातनाम वकील विक्रम सिंह आर्य, जो बड़े कद वाले हैं और कई अहम पदों पर बैठे हैं। विक्रम सिंह आर्य सीकर जिले के खंडेला तहसील के बरसिंहपुरा गांव के रहने वाले हैं।

एडवाकेट विक्रम सिंह आर्य सीकर जिले में करीब पांच साल से काफी सक्रिय हैं। एडवोकेट आर्य कांग्रेस आलाकमान के सामने टिकट के लिए अपनी दावेदारी भी जता चुके हैं। जिले के विकास के लिए वकील आर्य काफी अहम बातें करते हैं, जिससे लगता है कि उन्होंने सीकर लोकसभा सीट को लेकर काफी पहले से होमवर्क भी पूरा कर लिया था।

एडवोकेट विक्रम सिंह आर्य लंबे से ही समाज सेवा से जुड़े हुए कहे जाते हैं। सीकर जिले में आर्य वर्षो से समाज सेवा का कार्य कर रहे हैं। पिछले दिनों भी उन्होंने कॉमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ मोदी कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में करवाया।

इस ऐतिहासिक आयोजन में कॉमनवेल्थ देशों के प्रतिनिधि और कई लोग शामिल हुए थे। आर्य कहते हैं कि, ‘राजस्थान में इस तरह का यह पहला आयोजन था। विक्रम सिंह आर्य को उनकी योग्यता देखकर उन्हें 2013 में अंतरराष्ट्रीय संस्था कोमनवेल्थ लीगल एजुकेशन एसोसिएशन का सेक्रेटरी बनाया गया था।’

इससे जुड़ने के बाद एडवोकेट बेंगलुरु स्कॉटलैंड सहित कई जगहों पर आयोजित सेमिनार में अपनी योग्यता दिखाई। आर्य की बड़ी पहचान तब हुई इस संस्था से जुड़ने का मौका मिला।

साल 2014 में सदस्य इस संस्था में भी सक्रिय भूमिका के चलते ही एडवोकेट आर्य नई दिल्ली में आयोजित सेमिनार का हिस्सा बनने में कामयाब रहे। इस आयोजन में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और वहां के कई जजों ने भी शिरकत की थी।

इसमें तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा, एजी ऑफ इंडिया के के वेणुगोपाल प्रमुख भूमिका में थे। आम तौर पर सफल हो जाने के बाद व्यक्ति अपने गांव से दूर हो जाता है, लेकिन एडवोकेट आर्य लोगों की भीड़ से कोसों दूर नजर आ रहे हैं।

साल 2013 में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के तहत अपने ही गांव में भारत में किसानों के अधिकार नाम से सेमिनार का आयोजन किया था। जिसमें उस समय के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बी एस चौहान, फार्म्स राइट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन आरआर हंचीलाल समेत देश के कई दिग्गजों ने फसल बीमा को लेकर किसानों को उनके अधिकारों की जानकारी दी।

एडवोकेट आर्य ने साल 2015 में भी ऐसा ही आयोजन खाटूश्यामजी में किया। राजस्थान हाई कोर्ट के न्यायाधीश सुनील अम्बवानी, राजस्थान के मुख्य निर्वाचन आयुक्त रामलुभाया समेत कई दिग्गजों ने करीब 3000 किसानों को जागरूक किया।

राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील अजय गुप्ता यहां बड़े बदलाव की बात कर रहे थे, कि एडवोकेट आर्य ने सीकर लोकसभा क्षेत्र के जो आयोजन किए, उसमें वहां की किसानों में जागरूकता जरूर आई है।

इस चेतना आयोजन होने की बड़ी वजह खुद आर्य बताते हैं कि “मैं किसान परिवार से हूं, इसलिए पता है कि किसानों के लिए इस तरह के आयोजन कितने हम हो जाते हैं।”

उल्लेखनीय है कि अपने ही बूते पर आज जिस मुकाम पर एडवोकेट आर्य खड़े हैं, वह काफी संघर्ष वाला था। किसान परिवार में जन्मे विक्रम सिंह आर्य शुरुआती शिक्षा अपने गांव बरसिंगपुरा में हुई। उसके बाद राजस्थान विश्वविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई की।कांग्रेस के टिकट पर एक और वकील मैदान में उतरने को तैयार, सीकर से जताई दावेदारी 1

एडवोकेट आर्य ने साल 2000 में वकालत की पढ़ाई की थी। फिर अगले साल जयपुर में सीनियर एडवोकेट अजय गुप्ता के साथ राजस्थान हाईकोर्ट में वकालत ?शुरू की। एडवोकेट गुप्ता बताते हैं कि विक्रम सिंह आर्य ने हमेशा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की प्राथमिकता रखते थे।

उनके बारे में गुप्ता बताते हैं कि विक्रम सिंह आर्य ऑफिस में देर रात तक काम करते थे, आगे बढ़ने की इच्छा शक्ति उनमें बहुत पहले से थी। किसान और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की मदद उनकी प्राथमिकता रहती थी, जो आज भी नजर आती है।

गुप्ता के मुताबिक विक्रम सिंह आर्य किसानों की जमीन से जुड़े मामलों हमेशा डूबे रहते थे, ऐसे मामले का निपटारा करने से पहले कभी नहीं रुके। एडवोकेट आर्य की सेवा भाविता को देखकर एडवोकेट गुप्ता ने बड़ी जगह जाने की सलाह दी।

गुप्ता ने सलाह दी कि शीर्ष कोर्ट में जाने से वह किसानों की और ज्यादा मदद हो सकते हैं, जो काफी पहले से न्याय से वंचित हैं। अपने लक्ष्य और देश के बड़े न्यायालय में वकालत करने के सपने ने एडवोकेट को दिल्ली बुला लिया।

आर्य ने साल 2009 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया में अपना रजिस्ट्रेशन करवाकर देश की सबसे बड़ी अदालत में पैरवी करते हुए और आगे बढ़ने का रास्ता तैयार कर लिया। गुप्ता बताते हैं कि एडवोकेट आर्य ने कड़ी मेहनत के दम पर खुद के लिए एक बड़ा एक रास्ता बनाया है।

इसके बाद आर्य ने साल 2011 में V&V एसोसिएट लीगल फर्म दिल्ली को आरके पुरम में खड़ी की। इसके बाद एडवोकेट विक्रम सिंह आर्य का काम और उसे करने के अलग तरीके के कारण वह बड़े लोगों की नजर में आ गए।

योग्यताओं और कड़ी मेहनत के दम पर 46 साल के एडवोकेट विक्रम सिंह आर्य ने सीकर लोकसभा सीट से दावेदारी पेश की है। वकालत में अनुभव की बात करें तो विक्रम सिंह आर्य कॉमन वेलफेयर लीगल एजुकेशन एसोसिएशन के सेक्रेटरी ( secretary common law Legal education Association South Asia) और इसके अलावा सार्क लॉ चैप्टर के मेंबर ( member sark law india chapter) हैं।

एडवोकेट विक्रम सिंह आर्य के पिता सीकर में जिला सहकारिता कॉपरेटिव बैंक के वाइस चेयरमैन रह चुके हैं। बहरहाल सीकर लोकसभा सीट से कांग्रेस में टिकट मांगने वालों में सुभाष महरिया के साथ उनका कड़ा मुकाबला है, लेकिन नया चेहरा होने के कारण एडवोकेट आर्य प्राकृतिक रूप से ही मुख्य दावेदार हो जाते हैं।

देखना दिलचस्प होगा कि एडवोकेट आर्य कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं। यदि वह यह कारनामा कर पाए तो उनका नाम भी आने वाले दिनों में कांग्रेस के कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद, मनीष तिवाड़ी और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे बड़े लीडर्स में शुमार हो जाएगा।
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