महाराजा कॉलेज की सैकण्ड ईयर में होंगे 10 साल बाद एडमिशन

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जयपुर।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजस्थान विश्वविद्यालय को महाराजा कॉलेज में सैकण्ड ईयर में रिक्त सीटों पर नॉन कॉलेजिएट छात्रों को प्रवेश देने का आदेश दिया है।

न्यायाधीश आलोक शर्मा ने नैतिक शर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह अंतरिम आदेश दिया।
नैतिक के अधिवक्ता विनोद कुमार गुप्ता ने न्यायालय को बताया कि विश्वविद्यालय की कॉलेजों में रिक्त सीट रहने पर नॉन कॉलेजिएट छात्र-छात्राओं को द्वितीय वर्ष में प्रवेश देने का प्रावधान है।

प्रार्थी ने महाराजा कॉलेज में आवेदन किया लेकिन कॉलेज ने प्रवेश देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि भले ही प्रोस्पेक्टस में बीएससी गणित के लिए 360 सीटें स्वीकृत हों लेकिन द्वितीय वर्ष में सेक्शन कम कर दिए जाते हैं।

यह भी कहा गया कि लैब जैसा इन्फ्रास्ट्रक्चर कम है इसलिए प्रवेश नहीं दिया जा सकता। दूसरी ओर प्रार्थी की ओर से बताया गया कि महारानी कॉलेज में प्रथम वर्ष और द्वितीय वर्ष में सीटों की संख्या समान रखी जा रही है।

जबकि महाराजा कॉलेज में सीटों की संख्या घटा दी गई है। महाराजा कॉलेज में पिछले साथ प्रथम वर्ष गणित में 383 प्रवेश दिए गए थे। इस साल द्वितीय वर्ष में सीट घटाकर 303 कर दी गई हैं।

सुनवाई के दौरान ही विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने नियमानुसार प्रवेश देने पर सहमति जताई जिसके बाद न्यायाधीश आलोक शर्मा ने आदेश दिया कि एक सप्ताह में द्वितीय वर्ष में प्रवेश के लिए विज्ञापन जारी कर आवेदन मांगे जाएं और रिक्त सीटों पर प्रवेश दिया जाए।

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