अशोक गहलोत को टिकट देना ही मुख्यमंत्री का उम्मीदवार तय करना है!

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- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

जयपुर।

राजस्थान में 7 दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस टिकट बंटवारे को लेकर युद्ध स्तर पर मंथन कर रही है।

सोशल मीडिया पर 2 दिन से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के उम्मीदवारों की सूचियां वायरल हो रही है। हालांकि, दोनों ही पार्टियों ने दावा किया है कि अभी पैनल तैयार हुए हैं और उन पर मंथन चल रहा है। अब भी दो-तीन बैठक के बाद पहली सूची जारी की जाएगी।

बुधवार को नई दिल्ली में कांग्रेस इलेक्शन कमेटी की उच्चस्तरीय बैठक हुई करीब ढाई घंटे तक चर्चा के बाद सामने आया कि अभी कोई भी सूची जारी नहीं की जा रही है।

हालांकि, कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि पार्टी ने 80 जनों के टिकट तय कर दिए हैं, लेकिन इधर स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष कुमारी शैलजा ने कहा है कि दो-तीन मीटिंग के बाद टिकटों का बंटवारा तय किया जाएगा।

इधर भारतीय जनता पार्टी के टिकटों को लेकर राजस्थान चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि राज्य की कोर कमेटी ने पैनल तैयार कर आलाकमान को सौंप दिया है। अभी केंद्रीय नेतृत्व को ही तय करना है कि टिकट किसको देना है और किसको नहीं।

कांग्रेस पार्टी की बैठक के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पहली सूची में सरदारपुरा से अशोक गहलोत का नाम सामने आया है। बीते करीब ढाई साल से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मुख्यमंत्री की दावेदारी को लेकर शीत युद्ध चल रहा है।

ऐसे में पहली सूची में यदि अशोक गहलोत का नाम फाइनल होता है, तो इसका मतलब सीधे तौर पर उनको मुख्यमंत्री के रूप में पार्टी के तरफ से प्रोजेक्ट किया जाना तय है।

आज भी जिन उम्मीदवारों की सूची कांग्रे सूत्र बता रहे हैं, उनमें सचिन पायलट का नाम नहीं होने के कारण पार्टी नेताओं ने कयास लगाने शुरू कर दिए हैं कि राज्य में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार अशोक गहलोत को ही बनाया जाएगा।

सियासी जानकारों का कहना है कि अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले महज 5 महीनों के अंतराल में अशोक गहलोत को दो चुनाव लड़ाना कांग्रेस पार्टी की पसंद सूची में नहीं हो सकता।

यह भी दी घर है कि अशोक गहलोत लगातार खुद को राजस्थान का होने और राजस्थान के लोगों के बीच ही हमेशा खुद को बनाए रखने का दावा करते रहे हैं। इससे साफ जाहिर है कि वह अभी भी मुख्यमंत्री की रेस से बाहर नहीं हुए हैं।

कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि राहुल गांधी राजस्थान में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में है, लेकिन अशोक गहलोत के धड़े द्वारा उनके ऊपर दबाव बनाया जा रहा है, ताकि सचिन पायलट को केंद्र में फिर से शिफ्ट किया जा सके और गहलोत के नाम पर चुनाव लड़ा जा सके।

यदि अशोक गहलोत को विधानसभा चुनाव लड़वाया जाता है और मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाता है, तो यह भी सोचनीय है कि क्या उनको सचिन पायलट के मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी अथवा केंद्रीय राजनीति में भेजा जाएगा?

जिस तरह के संकेत कांग्रेस के सूत्र देते हैं, उनके मुताबिक अशोक गहलोत को विधानसभा चुनाव में लड़ाया जाएगा, जबकि सचिन पायलट को सुरक्षित रखकर सीएम बनने के बाद उपचुनाव के द्वारा मुख्यमंत्री बरकरार रखे जाने का निर्णय लिया जा सकता है।

जिस दिन कांग्रेस की पहली सूची जारी होगी, उसी दिन यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी, कि कांग्रेस पार्टी की तरफ से राजस्थान में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार अशोक गहलोत को बनाया जाता है, अथवा सचिन पायलट को 5 साल की मेहनत का ताज पहनाया जाता है?