9 सीटें BJP की, 7 कांग्रेस के खाते में, पढ़िए जयपुर जिले का समीकरण-

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जयपुर।

जयपुर जिले की 19 विधानसभा सीटों में से 9 सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में जाती नजर आ रही है। 7 सीटों पर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार भारी पड़ रहे हैं। जबकि 3 सीट निर्दलीय या राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी जीत सकती है।

जिले की सांगानेर विधानसभा सीट इस चुनाव में सबसे हॉट सीट बन चुकी है। यहां पर बीजेपी ने अभी तक अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है।

लेकिन भाजपा के टिकट पर तीन बार विधायक रहे घनश्याम तिवाड़ी पिछली बार रिकॉर्ड 65000 मतों से जीत कर आज की तारीख में सबसे भारी नजर आ रहे हैं।

301599 मतदाताओं में से सांगानेर में सबसे अधिक 52000 ब्राह्मण हैं, 18000 वैश्य, 5000 जैन, 18000 माली, 30000 एससी, 29000 ओबीसी, इनके अलावा 20000 हिंदी और पंजाबी वोटर्स हैं।

घनश्याम तिवारी ब्राह्मण समुदाय से आते हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी ने भी पुष्पेंद्र भारद्वाज के रूप में ब्राह्मण समाज कार्य उम्मीदवार मैदान में उतारा है। ऐसे में 52000 वोटों में से आधे आधे मतदाता भी दोनों में बंटते हैं, तो एससी और ओबीसी के साथ ही सिंधी पंजाबी और वैश्य निर्णायक भूमिका में होंगे।

मालवीय नगर सीट पर भाजपा के कालीचरण सराफ और कांग्रेस की अर्चना शर्मा में सीधी टक्कर है। इस विधानसभा सीट पर 46000 बनिए मतदाता हैं, जबकि 40,000 ब्राह्मण हैं, 20000 जैन, 22000 माली, 30000 एससी, 20000 ओबीसी के साथ कुल 212127 वोटर्स हैं।

कालीचरण सराफ पिछली बार यहां से 48000 मतों से जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। इस बार भी उन पर लगे तमाम आरोपों के बावजूद फिलहाल कांग्रेस की उम्मीदवार अर्चना शर्मा पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।

196306 वोटर्स के साथ किशनपोल सीट पर बीजेपी के मोहनलाल गुप्ता बढ़त की स्थिति में नज़र आ रहे हैं। हालांकि यहां पर 65,000 मुस्लिम है, लेकिन 35000 ब्राह्मण, 45000 वैश्य मतदाता होने के कारण मोहनलाल गुप्ता के पक्ष में मामला बनता नजर आ रहा है। गुप्ता 2013 में यहां से 9684 वोटों से जीत चुके हैं।

मंत्री अरुण चतुर्वेदी और कांग्रेस के शहर अध्यक्ष प्रताप सिंह के मैदान में होने के कारण सिविल लाइन सीट भी दोनों ही पार्टियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यहां पर 235078 मतदाता हैं।

जाति आधार पर बात करें तो यहां पर सबसे ज्यादा 75000 ओबीसी हैं, जिनमें 35,000 माली वोटर हैं, इसके अलावा 45000 ब्राह्मण, 20000 क्षत्रिय, 45000 वैश्य और 35000 मुस्लिम मतदाता हैं।

प्रताप सिंह सचिन पायलट के खेमे से माने जाते हैं। ऐसे में माली मतदाताओं का रुझान अरुण चतुर्वेदी की तरफ है। ब्राह्मण स्वतः ही चतुर्वेदी को वोट देने के लिए माने जाते हैं, तो दूसरी तरफ वैश्य मतदाता बीजेपी के परंपरागत वोटर होने के कारण प्रताप सिंह की राह इस बार भी बेहद कठिन है।

मोदी लहर में 19602 मतों से जीतने वाले 5 बार के विधायक और तीन बार के मंत्री राजपाल सिंह शेखावत को इस बार झोटवाड़ा विधानसभा से दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

356039 वोटर्स में से इस विधानसभा क्षेत्र में राजपूत, यादव, जाट, ब्राह्मण बहुतायत में हैं, जबकि राजपाल सिंह शेखावत के बजाय इलाके में लोग लालचंद कटारिया को अधिक सहज और सुलझे हुए व्यक्तित्व का उम्मीदवार मानते हैं।

बीते 2013 के विधानसभा चुनाव में राजपा के उम्मीदवार रहे हरीश यादव ने 35 हजार वोट हासिल किए थे, जबकि ब्राह्मण, जाट और अन्य ओबीसी जातियां लालचंद कटारिया के पक्ष में नजर आ रही है। राजपूतों में भी एक धड़ा राजपाल शेखावत से नाखुश है।

239390 मतदाताओं के साथ क्षेत्रफल की दृष्टि से बहुत बड़ी विधानसभा सीट है बगरू। बगरू से पिछली बार युवा उम्मीदवार कैलाश वर्मा मोदी लहर में 44000 वोटों से जीत कर आए थे। लेकिन इस बार एक दर्जन से ज्यादा गांव में माहौल उनके लिए बेहद प्रतिकूल है।

इस विधानसभा क्षेत्र में करीब एक लाख एससीएसटी वोटर हैं, जबकि 30000 वैश्य, 30000 जाट, 40000 मुस्लिम, 10000 कुमावत और इसके अलावा 50000 ओबीसी मतदाता हैं।

यहां पर पिछली बार कांग्रेस के उम्मीदवार रहे डॉक्टर प्रह्लाद रघु निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं, जबकि हनुमान बेनीवाल की पार्टी से खड़े हुए उम्मीदवार भी फाइट में हैं। जाट एसटी, एसटी और मुस्लिम मतदाताओं के हनुमान बेनीवाल की पार्टी में जाने पर कैलाश वर्मा और कांग्रेस की गंगा देवी, दोनों के लिए ही राह बेहद कठिन होगी।

मीणा और एससी बहुल बस्सी विधानसभा क्षेत्र में 208286 वोटर हैं। यहां पर पिछली बार अंजू धानका 11339 मतों से जीती थीं। अंजू लगातार दो बार निर्दलीय चुनाव जीत चुकी हैं, इस बार फिर से मैदान में हैं।

कांग्रेस पार्टी ने जहां दौलत सिंह मीणा को टिकट दिया है वह भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर से कन्हैया लाल मीणा को मैदान में उतारा है। इस सीट पर ओबीसी मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं जो अक्सर अच्छा उम्मीदवार देखते हैं।

जमवारामगढ़ सीट पर कांग्रेस पार्टी ने गोपाल मीणा को टिकट दिया है, तो भारतीय जनता पार्टी ने महेंद्र पाल सिंह युवा उम्मीदवार के रूप में चुनावी समर में भेजा है। महेंद्र पाल सिंह पहली बार मैदान में उतरे हैं, जबकि यहां पर वर्तमान में बीजेपी के जगदीश मीणा विधायक हैं।

इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 62000 मीणा मतदाता हैं। 32000 एससी, 20000 ब्राह्मण और वैश्य के अलावा ओबीसी जातियां भी है। रिजर्व सीट होने के कारण यहां पर ब्राह्मण, ओबीसी और वैश्य मतदाता अच्छे उम्मीदवार की तलाश में है।

चाकसू विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान विधायक लक्ष्मी नारायण बेरवा का विरोध होने के कारण भारतीय जनता पार्टी ने युवा और सहज राम अवतार बैरवा को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस पार्टी ने 2008 में चुनाव हार चुके वेद प्रकाश सोलंकी पर ही भरोसा जताया है।

203727 मतदाताओं के साथ यहां पर मीणा जाट सबसे निर्णायक वोटर्स होते हैं। अभी हनुमान बेनीवाल ने यहां पर टिकट घोषित नहीं किया है, जबकि वर्तमान परिदृश्य में राम अवतार बैरवा वेद प्रकाश सोलंकी पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।

राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके मनीष यादव को इस बार कांग्रेस पार्टी ने मैदान में उतारा है, जबकि पिछली बार यादव यहां पर निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं।

वर्तमान में विधानसभा के उपाध्यक्ष राव राजेंद्र सिंह 2013 में पूर्व राज्यपाल कमला बेनीवाल की बेटी आलोक बेनीवाल को 2397 मतों से हराकर विधानसभा पहुंचे थे। आलोक बेनीवाल इस बार निर्दलीय मैदान में हैं, जबकि यहां पर जाट और यादव मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।

रामेश्वर डूडी का नाम जोड़ने के कारण फुलेरा विधानसभा सीट पर स्पर्धा चौधरी कांग्रेस से बाहर हो चुकी हैं। स्पर्धा चौधरी को हनुमान बेनीवाल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के टिकट पर मैदान में उतार सकते हैं। यहां पर पार्टी ने डॉ हरी सिंह के बेटे विद्याधर चौधरी को टिकट दिया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने वर्तमान विधायक निर्मल कुमावत पर भरोसा जताया है।

238854 मतदाताओं में सबसे ज्यादा 48000 कुमावत, 48000 जाट, 26000 एससी और एसटी वोटर हैं, जबकि यहां पर मोदी लहर में साल 2013 के चुनाव में निर्मल कुमावत 24297 मतों से जीत चुके हैं।

चोमू विधानसभा सीट पर 2008 भगवान सहाय सैनी चुनाव जीते। 2003 में भाजपा के रामलाल शर्मा जीत कर आए थे। 2013 में एक बार फिर रामलाल शर्मा विधायक बने। 219705 मैसेज वाली इस सीट पर ब्राह्मण, वैश्य, सैनी, जाट, यादव और एससी के मतदाता भी काफी प्रभावशाली है।

बाबूलाल नागर का टिकट काटकर कांग्रेस पार्टी ने युवा रितेश बेरवा को मैदान में उतारा है। भारतीय जनता पार्टी ने वर्तमान विधायक प्रेम बैरवा पर ही एक बार फिर से विश्वास जताया है, जबकि पिछले चुनाव में प्रेम चंद बेरवा ने बाबूलाल नागर के भाई हजारीलाल नागर को चित किया था।

हनुमान बेनीवाल के द्वारा यहां पर अपना उम्मीदवार उतारे जाने के कारण यह सीट काफी रोचक मोड में पहुंच चुकी है, जबकि यहां पर 229085 मतदाता हैं। इस सीट पर जाट वोटर निर्णायक भूमिका में होते हैं। नागर के निर्दलीय उतरने की स्थिति में यह सीट जिले की हॉट सीट में से एक हो जाएगी।

विराटनगर में डॉक्टर फूल चंद भिंडा एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हैं। पिछला चुनाव भिंडा कांग्रेस के रामचंद्र सराधना को 9398 मतों से हराकर जीते थे, जबकि यह सीट 52000 जाट मतदाताओं के साथ सबसे बड़ी सीटों में से एक है।

220571 मतदाताओं के साथ इस सीट पर 42000 गुर्जर और यादव वोटर्स हैं, जबकि 220571 मतदाता हैं। इनके अलावा ब्राह्मण वोटर निर्णायक भूमिका में होते हैं। बीजेपी छोड़ चुके कुलदीप धनकड़ हनुमान बेनीवाल के टिकट पर मैदान में उतर सकते हैं।

भाजपा के प्रवक्ता और चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक सतीश पूनिया आमेर विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार मैदान में हैं। पिछला चुनाव वह राजपा के प्रत्याशी रहे वर्तमान विधायक नवीन पिलानिया से 329 मतों से हार चुके हैं।

जबकि नवीन पिलानिया इस बार फिर से बसपा के उम्मीदवार बने हैं। यहां पर 42000 ब्राह्मण हैं, 45000 जाट इनके अलावा एससी, एसटी, ओबीसी और यादव निर्णायक भूमिका में होते हैं। आमेर विधानसभा में कुल 245776 मतदाता हैं।

विद्याधर नगर से पिछला चुनाव 37913 वोटों से जीतने वाले भैरों सिंह शेखावत के दामाद नरपत सिंह राजवी एक बार फिर से मैदान में हैं। वह अब तक से चुनाव लड़ चुके हैं जिनमें से पांच जीते हैं, तीन बार मंत्री रह चुके हैं।

नरपत सिंह राजवी के सामने कांग्रेस पार्टी ने इस बार टिकट बदलते हुए सीताराम अग्रवाल को मैदान में उतारा है। यहां पर 48500 राजपूत हैं। अट्ठासी हजार वैश्य और ब्राह्मण मतदाता हैं। ओबीसी वोटर्स काफी निर्णय की स्थिति में रहते हैं, जबकि जाट मतदाता भी सीमित संख्या में हैं।

231008 मतदाताओं के साथ हवा महल सीट पर सबसे ज्यादा वोटर 60000 ब्राह्मण हैं, 25000 वैश्य, 80000 अल्पसंख्यक हैं, 25000 माली, 15000 सिंधी हैं, जबकि कांग्रेस के पूर्व मंत्री रहे ब्रजकिशोर शर्मा ने बगावत करते हुए निर्दलीय पर्चा दाखिल कर दिया है।

कांग्रेस पार्टी ने इस बार पूर्व सांसद महेश जोशी को टिकट दिया है तो भारतीय जनता पार्टी की तरफ से लगातार दूसरी बार सुरेंद्र पारीक उम्मीदवार हैं। पिछला चुनाव सुरेंद्र पारीक ने बृज किशोर शर्मा को हराते हुए 12615 वोटों से जीता था।

लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे अशोक परनामी पिछला चुनाव महज 12 मतों से जीत कर विधानसभा पहुंचे थे, जबकि इस बार उनके सामने कांग्रेस ने रफीक खान को टिकट दिया है।

240476 मतदाताओं वाली सीट पर 93000 मुस्लिम है, 52000 वैश्य। इनके अलावा 18000 ब्राह्मण, 23000 एससी एसटी और 10000 जैन मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं। यहां से कांग्रेस के राजीव अरोड़ा टिकट मांग रहे थे।

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