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New delhi news.

देश में जहां पर भारतीय जनता पार्टी (bjp) को बहुमत मिला, वहां पर पांच साल में 85% काम हुआ है, जबकि जहां पर कांग्रेस को बहुमत था, वहां पर केवल 8% काम हुआ है।

जी हां! यह वह सच है, जिसको कोई झुठला नहीं सकता, क्योंकि यह बात सरकारी आंकड़ों में दर्ज रिकॉर्ड कह रहा है, जो अचार संहिता लगने के साथ ही इतिहास बन चुका है।

यह रिकॉर्डेड आंकड़े देश की सबसे बड़ी पंचायत, यानी संसद (लोकसभा और राज्यसभा) के हैं। जहां से कानून बनाकर देश में लागू किये जाते हैं। लोकसभा, यानी निचले सदन में पिछले 5 साल में भाजपा को बहुमत था, तो राज्यसभा, मतलब उच्च सदन में बहुमत कांग्रेस समेत विपक्ष के पास था।

तीन तलाक बिल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार पांच साल के दरमियान सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 3 बार अध्यादेश ला चुकी है, दो बार लोकसभा में बिल पास किया जा चुका है, लेकिन हर बार बिल ड्राफ्ट से कानून बनने से राज्यसभा में रह जाता है। 30 साल पहले बन चुके बेनामी संपत्ति कानून को इसी सरकार ने अमलीजामा पहनाया।

यह कानून 30 बरस पहले ही बनकर तैयार था, लेकिन पिछली सरकारों ने इसके नियम बनाकर नोटिफिकेशन ही जारी नहीं किया। पीएम मोदी सरकार ने इसको लागू कर 5 साल में करीब 35000 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्तियों को जप्त किया है।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर अफ़सोस जाहिर करते हुए पिछले दिनों कहा था कि लोकसभा में चुने हुए नए-पुराने लोग आते हैं, जिनको अधिक समझ हो यह जरूरी नहीं। जिसके चलते कई बार वे अच्छे-बुरे का फैसला नहीं कर पाते हैं।

लेकिन राज्यसभा ऐसा सदन है, जहां पर हमारे देश से बुद्विजीवी, कलाकार, फनकार, मेच्योर और खूब अनुभवी ज्ञान की मूर्तियां विराजमान होती हैं। जिससे काम बिगड़ने की संभावना नहीं के बराबर होती है।

किन्तु अफ़सोस इस बात का है कि इन पांच बरसों में जहां लोकसभा में 85% काम हुए, वहीं राज्यसभा में केवल 8% काम हुए हैं। इससे साबित होता है कि काम कहां हो रहा है और समझ किस जगह विराजती है।

इन पांच बरसों में तीन तलाक बिल, बेनामी संपत्ति बिल, जीएसटी, सांसदों की अनियमित बढ़ोतरी सैलरी पर रोक लगाने का बिल, आधार बिल, 1400 कानूनों को खत्म करने समेत सैकड़ों काम दोनों सदनों में हुए हैं।

आपको एक बार फिर से याद दिला दें कि 2014 से 2019 वाली निवर्तमान लोकसभा में जहां बीजेपी 282 सांसद थे, तो एनडीए के 336 एमपी जीतकर पहुंचे थे। इस तरह लोकसभा में बीजेपी नीत गठबंधन बहुमत में था, मगर राज्यसभा में बीजेपी और एनडीए को बहुमत नहीं था।