– लोन माफ करने के चुनावी वादे में फंस गया किसान

Jaipur

राजस्थान में दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के द्वारा किसानों का संपूर्ण ऋण माफ करना का वादा और उसके बाद ऋण माफ करना किसानों के लिए मुसीबत बन गया है।

खरीफ फसल के लिए आवेदन किए गए 20 लाख किसानों में से केवल 13 लाख को लोन मिल पाया है, 7 लाख किसान अभी भी ऋण के इंतजार में हैं, जबकि ऋण उपलब्ध करवाने की समय सीमा 30 सितंबर खत्म होने में केवल 8 दिन शेष रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक नाबार्ड के द्वारा रियायत दर पर बजट उपलब्ध कराने से इनकार किए जाने के कारण राजस्थान के राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) ने जिला सहकारी समितियों को बजट देने से मना कर दिया है।

गौरतलब है कि राजस्थान में नई सरकार के गठन के बाद सरकारी दावे के मुताबिक 20 लाख किसानों का लोन माफ किया गया था, जिसके चलते राज्य में खरीफ की फसल के लिए अप्रैल से शुरू होने वाली ऋण की प्रक्रिया अटक गई।

जुलाई तक जो लोन प्रक्रिया पूरी होनी थी, वह 30 सितंबर तक भी पूरी नहीं हो पा रही है।

ऐसे में राज्य के आवेदन कर चुके 7 लाख किसानों को लोन नहीं मिल पा रहा है।

समय पर फसली ऋण नहीं मिलने के कारण कई किसानों ने फसल की बुवाई भी नहीं की है।

परिणाम यह हुआ कि राज्य में अच्छे मानसून के बावजूद उनके खेत खाली रह गए हैं।

दूसरी तरफ वित्तीय संसाधनों का अभाव बताकर रियायती ऋण देने के बजाय कर्ज माफी के कारण वित्तीय संकट झेल रहे सभी जिलों के केंद्रीय सहकारी बैंकों ने महंगी ब्याज दर पर ऋण देने से इंकार कर दिया है।

नाबार्ड को पत्र लिखकर अपेक्स बैंक ने कहा है कि पहले से ही स्वीकृत साख सीमा के तहत रियायती दरों पर बजट उपलब्ध करवाया जाए, ताकि समय रहते किसानों को लोन वितरित किया जा सके।

गौरतलब है कि इस बार ब्याज मुक्त ऋण देने के लिए राज्य के सहकारी बैंकों ने ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की थी।

जिसके तहत राजस्थान के 20 लाख किसानों ने रण के लिए आवेदन किया था। उनमें से अब तक केवल 13 लाख किसानों को ही लोन वितरण किया गया है।

समझने वाली बात यह है कि राज्य के अन्नदाताओं को लोन उपलब्ध करवाने के लिए नाबार्ड राज्य के सहकारी बैंक को 4.50 प्रतिशत ब्याज दर पर बजट उपलब्ध करवाता है।

इसको अपेक्स बैंक के द्वारा 4.70 फीसदी की दरों पर जिलों में स्थित केंद्रीय सहकारी बैंकों को पैसा भेजा जाता है।

जहां से सहकारी बैंकों के द्वारा ग्राम सहकारी समितियों को 5% ब्याज दर पर बजट दिया जाता है। यह सहकारी समितियों के द्वारा 7 फीसदी दर पर किसानों को मिलता है। जिसमें से 3% की भरपाई नाबार्ड के द्वारा की जाती है, जबकि 4% ब्याज दर राज्य सरकार वहन करती है।

नाबार्ड के द्वारा हर साल रियायती दरों पर पुनर्भरण उपलब्ध करवाने का काम किया जाता है, किन्तु इस बार इनकार किये जाने के कारण नया संकट खड़ा हो गया है।

गौरतलब है कि सहकारी समितियों के द्वारा दिए जाने वाले ऋण में से पिछली सरकार ने वसुंधरा राजे के द्वारा 50 हज़ार रुपये तक के लोन माफ किए गए थे।

इन्हीं सहकारी समितियों के द्वारा दिए गए ऋण में से नई सरकार ने सत्ता संभालने के बाद 2 लाख रुपये तक का लोन माफ करने का ऐलान किया था।

हालांकि, अधिकांश किसानों को 30 हजार से लेकर 50 हज़ार रुपये तक का ही ऋण मिलता है।

पूर्वर्ती वसुंधरा राजे सरकार के द्वारा 7174 हजार करोड रुपए और वर्तमान सरकार के द्वारा करीब 18 करोड रुपए कारण माफ करने का दावा किया गया है।