जयपुर।
टिकट बंटवारे के साथ ही मान—मुनव्वल का दौर शुरू हो चुका है। भाजपा के जयपुर शहर प्रत्याशी और वर्तमान सांसद रामचरण बोहरा के पक्ष में 9 में 7 विधायक नहीं हैं। हालात यह है कि दो वही विधायक रामचरण बोहरा के साथ हैं, जो हाल ही में विधानसभा चुनाव हार चुके हैं।

अब टिकट मिलने पर बोहरा इन सभी विधायकों को साधने में जुट गए हैं। सांगानेर के अशोक लाहोटी, मालवीय नगर के कालीचरण सराफ और विद्याधर नगर के विधायक नरपत सिंह राजवी ने तो संभवत: खुलेआम बोहरा के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया है।

आज सुबह रामचरण बोहरा दुर्गापुरा स्थित अपने आवास से खोले हनुमान मंदिर के लिए पैदल यात्रा पर निकले, लेकिन जयपुर जिले का एक भी विधायक या विधायक प्रत्याशी उनके साथ नहीं गया। इससे साफ जाहिर है कि बोहरा के खिलाफ संगठन में कितनी नाराजगी है।

भाजपा सूत्रों के अनुसार झोटवाड़ा प्रत्याशी राजपाल सिंह, बगरू के कैलाश वर्मा, रामगढ़ के भाजपा प्रत्याशी, सिविल लाइंस के अरूण चतुर्वेदी, आदर्श नगर से अशोक परनामी भी बोहरा के नाखुश हैं।

भाजपा सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि सांगानेर विधायक और मावलीय नगर विधायक ने तो साफतौर पर बोहरा को साथ देने से इनकार कर चुके हैं। ऐसे में करीब 5 लाख वोटबैंक को लेकर असमंशज बन गया है। हालांकि, वोट रामचरण बोहरा को नहीं मिलकर पार्टी को मिलेंगे, फिर भी बोहरा के लिए इन मौजूदा विधायकों को साधना चुनौती हो गई है।

अपने ही लोगों के खिलाफ होने से जहां कांग्रेस उम्मीदवार की राह आसान हो जाएगी, वहीं 5.39 लाख से अधिक वोटों से जीतने वाले रामचरण बोहरा के लिए दूसरी बार जीतकर संसद पहुंच इतिहास बनाने की चुनौती भी रामचरण बोहरा के समक्ष रहेगी।

आपको बता दें कि यह सीट हमेशा भाजपा का गढ़ रही है। जयपुर राजघराने की राजमाता गायत्री देवी जयपुर से स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर 1962, 1967 और 1971 में सांसद बनी थीं। उसके गिरधारी लाल भार्गव 6 बार सांसद बने। केवल 2009 में ही कांग्रेस के महेश जोशी ने भाजपा के घनश्याम तिवाड़ी को हराकर इतिहास रचा था।