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बीते दिनों 5 अगस्त 2019 को लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा जब धारा 370 के प्रावधान बदलने और अनुच्छेद 35a को हटाने का बिल पास करवाते ही जम्मू-कश्मीर में जमीन को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं हो गई।

लोगों ने कहा कि अब वह भी जम्मू-कश्मीर में जाकर जमीन लेंगे और वहीं पर खेती करेंगे, उद्योग धंधा स्थापित करेंगे, दुकाने लगाएंगे जैसी बातें सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रही।

लोगों ने तरह-तरह की बातें की, लेकिन जब वह वास्तविकता की बात की जाती है तो जम्मू कश्मीर में श्रीनगर ऐसा इलाका है, जहां पर मुंबई से भी महंगी जमीन मिल रही है।

ऐसे में लोगों का सपना सपना ही रह जाता है। हालांकि जम्मू कश्मीर के ही अनंतनाग में सबसे सस्ती जमीन भी है। अनंतनाग आतंकवाद से ग्रसित सबसे भीषण इलाकों में से एक है।

जम्मू कश्मीर राज्य की कुल जमीन की बात की जाए तो वहां पर 2.22 लाख वर्ग किलोमीटर जमीन की जांच में कई तथ्य निकलकर सामने आए हैं।

सबसे रोचक बात यह है कि यहां पर 63 फ़ीसदी से ज्यादा लोगों के पास सवा एकड़ से कम जमीन है, राज्य में महज 95 लोग ऐसे हैं, जिनके पास 20 या अधिक हेक्टेयर खेती की जमीन है।

जम्मू कश्मीर में जमीनों के दाम की बात की जाए राजधानी श्रीनगर में सबसे महंगी जमीन है, यहां की जमीन देश के आर्थिक राजधानी मुंबई और गुरु ग्राम से भी महंगी जमीन मिल सकती है।

यहां के रेजिडेंसियल रोड पर महज 1500 वर्ग फीट क्षेत्र के लिए कमर्शियल किराया करीब डेढ़ लाख रुपए प्रतिमाह तक है।

ऐसे ही मुंबई के गोरेगांव इलाके में भाव है। यहां पर कनाल में बने एक मकान की कीमत 5 करोड रुपए तक हैं। एक कनाल में 5445 वर्ग फिट जमीन होती है।

जम्मू कश्मीर के रिहायशी इलाकों में जमीन की औसत कीमत ₹8000000 से 2 करोड रुपए प्रति कनाल है। यहां पर गांधीनगर को सबसे रॉयल कॉलोनी माना जाता है, जहां पर जमीन का सर्किल रेट सवा करोड़ से अधिक है।

एक कनाल प्लॉट की कीमत करीब 4 करोड रुपए तक बैठती है। जम्मू कश्मीर के सांबा क्षेत्र में, जहां पर एम्स अस्पताल और सेंट्रल यूनिवर्सिटी तक है, यहां की कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ने की संभावना है, क्योंकि यह इलाका सबसे पहले विकसित हो रहा है।

जबकि आतंकवाद से प्रभावित अनंतनाग जिले में सबसे सस्ती जमीन है। यहां के हुसैनाबाद जैसे रिहायशी इलाकों में भी 5.20 करोड़ रुपए प्रति कनाल जमीन की कीमत है, यानी केवल 95.5 वर्ग फीट है।

जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद नेताओं के पेट में दर्द होने की सच्चाई जाने तो सामने आता है कि करोड़ों अरबों रुपए के मालिक यह नेता जम्मू कश्मीर को अपनी सल्तनत समझते हैं।

यही कारण है कि यहां के गरीब और किसानों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है फिर भी यह लोग धारा 370 का समर्थन करते हैं।

जम्मू कश्मीर के पूर्व राजा हरि सिंह के बेटे करण सिंह के पास 95.21 करोड रुपए की जमीन की मार्केट वैल्यू है। यह चीज उन्होंने राज्यसभा में शपथ पत्र देते हुए बताया।

करण सिंह के पास श्रीनगर में 11 और 31 एकड़ के दो बाग हैं। जम्मू में ही 78 एकड़ में बाघ है। पहलगाम में भी 4 एकड़ में जमीन है। हालांकि करण सिंह के पास अधिकांश संपत्ति पुश्तैनी है और उन्होंने धारा 370 हटाने को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की तारीफ भी की है।

सबसे बड़े राजनीतिक परिवार के तौर पर जाने वाले फारूक अब्दुल्लाह की बात की जाए तो उनके पास ₹106000000 की मार्केट वैल्यू की जमीन है। फारूक अब्दुल्ला के पास 1.12 एकड़ खेती में जमीन है। दो मकान भी है।

उनके बेटे उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर में 2014 विधानसभा चुनाव में किसी भी तरह की जमीन ना होने की बात बताई थी। जबकि बीते दिनों जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बताया कि उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्लाह की पूरे देश के कई उद्योग धंधों में साझेदारी है।

वहीं की एक दूसरी मुख्यमंत्री रही महबूबा मुफ्ती, जो कि पीडीपी के नेता हैं, उनके पास ₹5500000 मार्केट वैल्यू की संपत्ति बताई गई है।

2019 के चुनाव में उन्होंने शपथ पत्र में यह बात बताई थी। महबूबा मुफ्ती के पास 25 लाख रुपए कीमत की 5440 वर्ग फुट खेती की जमीन के साथ ही 5000 वर्ग फुट में घर भी बना हुआ है। हालांकि यह संपत्ति उन्होंने वह बताई है जो एक नंबर में है, दो नंबर में उनके पास अथाह संपत्ति बताई जाती है।

इसी तरह से कांग्रेस के नेता, जो कि लोकसभा और राज्यसभा में धारा 370 हटाने को लेकर सबसे ज्यादा विरोध कर रहे थे, उनके पास एक करोड़ 97 लाख रुपए की महाराष्ट्र में जमीन है और कश्मीर में पत्नी का घर है।

राज्यसभा चुनाव के शपथ पत्र में गुलाम नबी आजाद ने बताया था कि कश्मीर में उनके पास कोई जमीन नहीं है, पत्नी का श्रीनगर में ₹700000 का मकान है।

नेशनल कांफ्रेंस के नेता और अलगाववाद को हवा देने वाले मोहम्मद अकबर लोन के पास ₹596000000 की मार्केट वैल्यू की जमीन है। जमीन की बात की जाए तो बारामुला से सांसद अकबर लोन का 36 वर्ग फीट में घर बना हुआ है। 7.50 करोड़ रुपए की 11.8 एकड़ जमीन के मालिक अकबर लोन 25 वर्ग फीट नॉन एग्रीकल्चर लैंड के मालिक हैं।

इसी तरह से पीपुल्स कांफ्रेंस के इरफान रजा के पास भी 59 करोड़ 20 लाख रुपए मार्केट वैल्यू की जमीन है। उनके पास 22000 वर्ग फीट की कमर्शियल इमारत भी है। श्रीनगर से फारूक अब्दुल्लाह से चुनाव हारने वाले अंसारी के पास 21 पॉइंट 25 एकड़ में 12 करोड़ में खेती की जमीन बताई गई है।

जम्मू कश्मीर में फल और सब्जियों की बात की जाए तो यहां पर 332000 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियां होती है। यहां पर फल और सब्जियां दोनों के लिए यह खेती है। जिसमें से सर्वाधिक 165000 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब के बागान है।

इसी तरह से 85000 हेक्टेयर क्षेत्र में अखरोट लगते हैं। वहीं 5588 हेक्टेयर क्षेत्र में बादाम होती है। यह आंकड़े 2018-19 के हैं।

इसके साथ ही जम्मू कश्मीर में 56000 एकड़ पर रक्षा विभाग से जुड़ी हुए कार्य होते हैं। राज्य में पिछले 3 वर्षों में केंद्र सरकार ने भूमि मालिक या राज्य सरकार को किराए के रूप में 134 करोड़ चुकाए हैं। यह जानकारी राज्य सभा में राज्य श्रीपद नायक ने दी थी।