farmer suside in panjab
farmer suside in panjab

नई दिल्ली।
लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर कांग्रेस पार्टी ने ‘अब होगा न्याय’ का नारा भले ही दिया हो, लेकिन कांग्रेस पार्टी के ही शासनकाल वाली पंजाब सरकार की नाक के नीचे बीते 24 घंटों में पांच किसानों ने सुसाइड कर लिया है।

यहां के 5 किसानों की आत्महत्या की कहानी भी एक सी है। सभी किसानों के दुखद अंत का हिस्सा भी एक सा ही है। पंजाब के दुर्भाग्यशाली 5 किसानों ने पिछले 24 घंटे में जान दे दी।

कांग्रेस के कैप्टन अमरिंद्र सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री हैं। यहां के भटिंडा के चार किसानों ने और संगरूर के एक कृषक ने बीते 24 घंटे में कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या कर ली।

ये हाल उस राज्य का है, जिसमें हर दिन सरकार के मंत्री सरकारी खर्च पर तमाम कार्यक्रम करते हैं। जहां पर अन्नदाता को उनके ऋणमाफ करने के दावे के साथ चेक बांटते हैं। पंजाब सरकार के इन दावों की पोल पिछले 24 घंटे में हुई 5 कृषकों के सुसाइड ने खोल कर रख दी है।

पहली घटना पंजाब के बठिंडा में गांव श्रद्धा की है। यहां के रहने वाले कृषक परमजीत सिंह के पास 4 एकड़ जमीन है, मगर तमाम कमाई और कर्जा चुकाने क बाद भी उसपर बैंक का ऋण बढ़कर 5 से 6 लाख रुपये तक पहुंच गया। नतीजा यह हुआ कि परमजीत सिंह ने आत्महत्या कर ली।

दूसरा हादसा भठिंडा जिले में ही गांव दयालपुरा मिर्जा की है। यहां पर अमृतपाल सिंह नामक कृषक ने जहरीला स्प्रे पीकर सुसाइड कर लिया। बताया जाता है कि अमृतपाल सिंह पर भी 6 से 7 लाख रुपये का लो था।

इसी तरह से तीसरी घटना भठिंडा के ही गांव ढिंगर की है। यहां जोगराज सिंह नामक कृषक, जो करीब 2 एकड़ भूमि का मालिक है। जानकारी के अनुसार जोगराज सिंह पर भी 3 लाख का ऋण था, जो चुकता नहीं किया गया था।

बताया जाता है कि पंजाब सरकार द्वारा की गई कर्जामाफी के दौरान उन्हें महज 18 हजार रुपए की सहायता मिली थी। जिसके चलते परेशान होकर जोगाराज सिंह ने भी खेत में जाकर जहरीला स्प्रे पीकर खुद की जीवन लीला समाप्त कर ली।

पंजाब में भठिंडा जिले के ही एक अन्य किसान ने कर्ज नहीं चुकने के कारण ट्रेन के आगे कूदकर सुसाइड कर लिया। बताया जाता है कि संग्ररूर में गांव गुरने कलां के 55 वर्षी किसान रामफल सिंह पर 20 लाख का कर्ज था। जबकि उसके पास सिर्फ 2 एकड़ ही जमीन थी।

मृतक रामफल के दो बेटे हैं, लेकिन दोनों बेरोजगार हैं। मृतक रामफल सिंह के बेटे गुरपाल सिंह ने बताया कि उनके परिवार का जमीन से गुजर-बसर हो नहीं रहा था। बैंकों और आढ़तियों का ऋण लगातार बढ़ने के कारण उनके पिता ने अपनी जान दे दी।

इस तरह से कर्जे में डूबे पंजाब के 5 किसानों ने बीते 24 घंटों में जान दे दी है। गंभीर बात यह है कि चुनाव में व्यस्त पंजाब सरकार के तमाम मंत्रियों के पास इन किसानों के परिवारों से सहानुभूति जताने का भी वक्त नहीं है। सरकार की पूरी कैबिनेट टीम पंजाब के शाहकोट विधानसभा में 28 मई को उपचुनाव है।

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