New delhi

देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद किसानों की आय में करीब करीब पौने 2 फ़ीसदी बढ़ती हुई है।

Information Technology industry body (Nasscom) अनुसार भारत में आज की तारीख में 450 स्टार्ट अप एग्रीकल्चर क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

नैसकॉम के मुताबिक दुनिया का हर 9वां स्टार्टअप भारत में काम कर रहा है, जो कृषि के लिए शुरू किया गया है।

भारत के किसानों के लिए ताजा आंकड़े प्रस्तुत करने वाले एग्रीटेक इन इंडिया इमर्जिंग ट्रेंड्स इन 2019 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार कृषि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्टार्टअप की वार्षिक वृद्धि 25 फ़ीसदी है और लगातार इसके बढ़ने की संभावना है।

जानकारी में आया है कि एग्रीकल्चर स्टार्टअप को इस साल की पहली छमाही में 1761 करोड़ पर से भी अधिक की फंडिंग मिली है, जो इस क्षेत्र के लिए अच्छी खबर मानी जा सकती है।

एग्रीटेक इन इंडिया इमर्जिंग ट्रेंड्स इन 2019 की रिपोर्ट को माने तो करीब 10 साल के दौरान भारत के किसानों की औसत आय में 1.7 गुणा तक का इज़ाफ़ा हुआ है।

किसानों के लिए और खेती करने वालों के लिए खुशखबरी यह है कि भारत में एग्रीटेक सेक्टर के इन्वेस्टर्स ग्लोबल और इस सेक्टर में फोकस करने वाले इन्वेस्टर्स द्वारा बीते कुछ वर्षों में सीधे तौर पर एग्रीकल्चर स्टार्टअप में इन्वेस्ट किया गया है, जो देश के किसानों के लिए अच्छी बात है।

आने वाले समय में एग्रीकल्चर क्षेत्र में स्टार्टअप में वृद्धि होने की संभावना जताई गई है। गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी की पहली सरकार के दौरान भारत में मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम शुरू किया गया था।

जिसके तहत न केवल विदेशी निवेश तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि भारत में भी एग्रीकल्चर से अब तक लगातार विमुख होने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है।

जो अत्याधुनिक खेती के साथ जैविक खेती पर काम करने की इच्छुक लोग हैं, उनका भी मानस कृषि की तरफ बढ़ा है, यह संकेत न केवल भारत के कृषि क्षेत्र के लिए अच्छा है, बल्कि पशुपालन को बढ़ावा देने वाला है।

क्योंकि कृषि और पशुपालन एक दूसरे के पूरक हैं। कृषि करने वाला व्यक्ति पशुपालन करने में सहज रहता है, जबकि पशुपालन करने वाला व्यक्ति भी कृषि कार्य सहजता से कर सकता है।

लगातार वृद्धि होने के कारण कृषि में निवेश करने वाले और रचनात्मक कार्य करने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि भारत की कृषि फिर से नई ऊंचाई पर पहुंच सकती है।

बहरहाल केंद्र सरकार के द्वारा शुरू की गई फसल बीमा योजना और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य, जहां पर गन्ने की बड़े पैमाने पर पैदावार होती है, वहां पर समय पर किसानों को भुगतान, हरियाणा में कृषि को बढ़ावा देने के लिए नए संयंत्र स्थापित करना और राजस्थान जैसे सूखे प्रदेश में कृषि की नई तकनीक को लगाना भी किसानों के लिए खुशखबरी के समान है।

दूसरी तरफ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी केंद्र सरकार ने कृषि को बढ़ावा देने के लिए यंत्रों की संख्या में वृद्धि की है।

यहां पर अभी तक मशीनों के बजाय अधिकांश खेती परंपरागत रूप से ऊपर आधारित है, जिसके कारण समय पर बुवाई और कटाई नहीं हो पाती है। यह किसानों को कमतर रखने का एक बड़ा कारण माना गया है।

अब तेजी से यंत्रों के आधार पर कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है। पंजाब जैसे क्षेत्र में जहां पर जहरीली खेती के लिए काफी बदनामी हो चुकी है, वहां पर भी जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

पंजाब सरकार केंद्र की मोदी सरकार के सहयोग से जगह-जगह जैविक खेती के प्लांट लगा रही है, जो अन्य किसानों को भी आकर्षित कर रहे हैं।