vaundhara raje ashok gehlot
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जयपुर।
राजस्थान में चार माह के दौरान दूसरा और सबसे बड़ा चुनाव हो रहा है। प्रदेश 7 दिसंबर को ही विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग कर चुका है। प्रदेश की 13 लोकसभा सीटों के लिए आज मतदान हो रहा है। 25 में से बची हुई 12 सीटों पर 6 मई को चुनाव होगा।

यह राज्य में पहले चरण का मतदान है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की पांच साल की सरकार की परीक्षा हो रही है, तो दूसरी तरफ चार माह पहले गठित हुई कांग्रेस के अशोक गहलोत सरकार अग्नि परीक्षा से गुजर रही है।

सबसे ज्यादा राजस्थान में चर्चा जोधपुर सीट की है। यहां पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत की सियासी जिंदगी की पहली परीक्षा हो रही है। एक तरह से यह परीक्षा खुद गहलोत की ही है।

हालांकि, कांग्रेस की राज्य सरकार ने दिसंबर 2018 में किए गए गए अपने वादों को लागू करने में पूरी तरह से कामयाबी नहीं रही है, लेकिन कैबिनेट में ताबड़तोड़ फैसलों पर मुहर लगवाकर जरूर वाहवाही बटोरने का काम किया है।

सबसे ज्यादा चर्चा और बहस का विषय है किसान कर्जमाफी और बेरोजगारी भत्ता। किसान कर्जमाफी को लेकर जहां कांग्रेस सफलता का ढोल पीट रही है, वहीं भाजपा इसको पूरी तरह नाकामी करार देकर हमले कर रही है।

बेरोजागारी भत्ते को लेकर सीएम गहलोत ने राजस्थान विश्वविद्यालय में युवाओं के सामने युवाओं को 3000 रुपए प्रतिमाह और युवतियों को 3500 रुपए हर माह देने का वादा किया था, लेकिन किस भी युवा के खाते में एक चवन्नी नहीं पहुंची है। इस बात से कांग्रेस भी इनकार नहीं कर सकती।

दूसरी तरफ झालावाड़ की सीट पर हैं पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह। दुष्यंत सिंह लगातार चौथी बार मैदान में हैं। यहां पर दुष्यंत सिंह 2004 से लेकर 2014 तक तीन बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। उनके सामने हैं कांग्रेस के प्रमोद शर्मा। प्रमोद शर्मा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे।

राजस्थान की 13 सीटों पर आज मतदान हो रहा है। अगले चरण में, जो कि देश का पांचवा चरण है, उसमें राज्य की बची हुई 12 लोकसभा सीटों पर मतदान होगा। जोधपुर और झालावाड़ की सीटों पर अपने बेटों के माध्यम से राजस्थान के दो मुख्यमंत्री चुनाव लड़ रहे हैं।