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रामगोपाल जाट@जयपुर।

राजस्थान में लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी उम्मीदवारी तय करने के लिए जोर-शोर से लगी हुई है। पार्टी 50 हज़ार कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करवाना चाहती है।

प्रदेश कांग्रेस पार्टी की चुनाव समिति के कितने सदस्य चुनाव से पहले लोकसभा की सभी 25 सीटों पर ऐसे दावेदारों को मैदान में उतारने के लिए तलाश रहे हैं, जो भारतीय जनता पार्टी को मात दे सके।

लेकिन खास बात यह है कि 41 सदस्य चुनाव समिति में से ही खुद आधे सदस्य ही लोकसभा चुनाव के लिए टिकट के जुगाड़ में लगे हुए हैं। चयन समिति के उपाध्यक्ष रामेश्वर डूडी बाड़मेर से लोकसभा चुनाव लड़ने को तैयार हैं, वह पिछले साल दिसंबर में नोखा से विधानसभा चुनाव हार गए थे।

इनके अलावा बड़े नेताओं में अलवर से पूर्व सांसद भंवर जितेंद्र सिंह, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चंद्रभान, पूर्व सांसद नरेंद्र बुडानिया, डॉ करण सिंह, नमो नारायण मीणा, डॉ गिरिजा व्यास टिकट के जुगाड़ में लगे हैं।

इनके साथ ही प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हरीश चौधरी, पार्टी के उपाध्यक्ष गोपाल सिंह ईडवा, पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, पूर्व सांसद अश्क अली टांक, यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष पवन गोदारा और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रेहाना रियाज भाई टिकट की दौड़ में हैं।

चुनाव समिति के सदस्यों के अलावा कई नेताओं के परिवार जन में टिकट की दौड़ में हैं। जिसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत, शांति धारीवाल की पुत्रवधू एकता धारीवाल, मास्टर भंवरलाल की बेटी बनारसी मेघवाल, दीपेंद्र सिंह शेखावत के बेटे बालेंद्र शेखावत, परसराम मोरदिया के बेटे महेश मोरदिया और बृजेंद्र ओला की पत्नी राजबाला ओला झुंझुनू से टिकट की दौड़ में हैं।

पिछले दिनों ही पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट ने ऐलान किया था कि प्रदेश का कोई भी मौजूदा विधायक लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेगा। इसके साथ ही पायलट ने दावा किया था, कि उनके परिवार से कोई भी व्यक्ति लोकसभा के लिए टिकट नहीं मांगेगा।

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