‘हमारी जान भी सस्ती है, 20 साल में 3 लाख ने आत्महत्या की है…’

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जयपुर/नई दिल्ली।

हिंदुस्तान में किसानों का दर्द क्या है? कर्ज के कारण किसान किस कदर पीड़ित है? न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलने के कारण किसानों की हालत कितनी खराब है? समर्थन मूल्य पर फसल नहीं खरीदने समय पर भुगतान नहीं होने के कारण किसानों की स्थिति क्या है?

इसको देखना हो तो अभी नई दिल्ली संसद मार्ग पर चले आइए। किसान अपनी मांगों को लेकर आज मार्च कर रहे हैं। यहां एकत्रित हुए किसानों ने लोगों से शामिल होने की अपील की है। यह है किसानों की अपील-

हम किसान हैं। आपको तंग करना हमारा इरादा नहीं। हम खुद बहुत परेशान हैं।

सरकार को और आपको अपनी आवाज सुनाने बहुत दूर से आए हैं। हमें आपका 1 मिनट चाहिए।

-मूंग बेचते हैं 45 रुपए किलो, बिकता है 120 रुपए किलोग्राम।

-सेब बेचते हैं 10 रुपए किलो, बिकता है 110 रूपए किलोग्राम।

-दूध बेचते हैं 20 रुपए किलो, खरीदते हैं 42 रुपए किलोग्राम।

-टमाटर बेचते हैं 5 रुपए किलो, खरीदते हैं 30 रुपए किलोग्राम।

यह है हमारी परेशानी। हम हर चीज महंगी खरीदते हैं और सस्ती बेचते हैं। हमारी जान भी सस्ती है।

पिछले 20 साल में 3 लाख से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं। हमारी मुसीबत की चाबी सरकार के पास है, लेकिन वह हमारी सुनती नहीं।

सरकार की जान मीडिया के पास है, लेकिन वह हमें देखता नहीं। मीडिया की चाबी आपके पास है।

आप हमारी बात सुनेंगे, इस उम्मीद से हम आपको अपने दुख तकलीफ समझाने आए हैं।

हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि संसद का एक विशेष अधिवेशन किसानों की समस्या पर बुलाया जाए और उसमें किसानों के लिए दो कानून पास किए जाएं।

पहला- फसलों के उचित दाम की गारंटी का कानून।

दूसरा- किसानों को कर्ज मुक्ति करने का कारण।

कुछ गलत तो नहीं मांग रहे हैं हम। अगर आपको हमारी बात सही लगी तो इस मार्च में दो कदम हमारे साथ चलिए।

30 नवंबर को संसद मार्ग पर हम इकट्ठे होंगे। आप आएगा, तो हमारा हौसला बढ़ेगा। आप आएंगे ना!