वसुंधरा, गहलोत, सचिन, बेनीवाल, तिवाड़ी, डूडी समेत 199 को मिलेगा यह तमगा-

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जयपुर।

राजस्थान में शुक्रवार को विधानसभा की 199 सीटों के लिए मतदान किया गया। प्रदेश में कुल औसत 75% से ज्यादा मतदान हुआ है। सभी 2274 प्रत्याशियों का भविष्य ईवीएम में बंद हो गया है, जो 11 तारीख को खुलेगा।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल, भारत वाहिनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी समेत कुल 199 लोगों के नाम के आगे 11 तारीख को विधायक लगने की पूरी संभावना है।

अलवर जिले की रामगढ़ विधानसभा में बहुजन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह का निधन होने के कारण वहां पर चुनाव निरस्त कर दिया गया था। इसलिए 200 सीटों वाली विधानसभा में केवल 199 सीटों पर ही चुनाव हुआ है।

हालांकि, इन नामचीन राजनेताओं के में से केवल सचिन पायलट के नाम के आगे अभी विधायक नहीं लगता लिखा जाता है, बाकी अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे, हनुमान बेनीवाल और घनश्याम तिवाड़ी बीते 5 बरस से विधायक हैं।

राजस्थान में 4.74 करोड़ मतदाताओं में से करीब 74% से ज्यादा वोटर्स ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। जिनके वोट से 2274 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला 11 दिसंबर को ईवीएम खुलने के साथ ही हो जाएगा।

कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री उम्मीदवार को लेकर विवाद शुरू हो चुका है पार्टी में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के रूप में दो धड़े मुख्यमंत्री के लिए कवायद में जुटे हुए हैं, जबकि नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी का धड़ा भी मुख्यमंत्री की दावेदारी पेश करने के लिए पूरी तरह से सक्रिय हो गया है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के गुट से माने जाने वाले कांग्रेस के जयपुर शहर अध्यक्ष और सिविल लाइन से प्रत्याशी प्रताप सिंह खाचरियावास अशोक गहलोत के द्वारा मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया के तौर पर गहलोत का विरोध कर चुके हैं।

हालांकि, खुद गहलोत ने उनके बयान का प्रतिकार करने के बजाए खाचरियावास से सहमति जताते हुए प्रदेश में कांग्रेस को बहुमत मिलने पर अगला मुख्यमंत्री राहुल गांधी के द्वारा बनाए जाने की बात कही है।

कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री की दावेदारी को लेकर बीते 2 साल से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच में बयानबाजियां होती रही है। अब चुनाव के बाद इसको लेकर कवायद और तेज हो गई है।

अशोक गहलोत खुद को बड़ा चेहरा कहते हुए हमेशा मुख्यमंत्री के लिए सबसे सूटेबल दावेदार बताते रहे हैं, जबकि सचिन पायलट ने राजस्थान में बीते 5 बरस में कांग्रेस पार्टी को फिर से खड़ा करके खुद को स्वतः मुख्यमंत्री का दावेदार साबित किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच मुख्यमंत्री को लेकर चल रही इस लड़ाई में नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी को गहलोत खुद किसान नेता के तौर पर मुख्यमंत्री के लिए आगे कर सकते हैं, इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है।

इधर भारतीय जनता पार्टी के तरफ से पहले ही वर्तमान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अगला मुख्यमंत्री का कैंडिडेट घोषित किया जा चुका है। जिसके चलते पार्टी में सीएम की दावेदारी में कोई लड़ाई नहीं है।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल खुद के 40 से ज्यादा विधायक जीत कर आने का दावा कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश में अगर उनके 20 विधायक भी जीतते हैं तो राज्य में सियासी समीकरण कुछ अलग होने की पूरी संभावना है।

अभी तक कांग्रेस पार्टी खुद के पूर्ण बहुमत में होने का दावा कर रही है, तो भाजपा फिर से सत्ता में लौटने की बात कह रही है। इस बीच राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में एक बार फिर से हंग असेंबली बन सकती है। जिसके चलते हनुमान बेनीवाल और अन्य निर्दलीय विधायकों का रोल काफी महत्वपूर्ण हो जाएगा।