—लोन बांटने से पहले ही फंस गए सहकारिता विभाग के अधिकारी
जयपुर।
राजस्थान सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा 50 हजार फर्जी किसानों को ऋण देने बांटने का कार्यक्रम धरा रह गया। मामला खुलने के कारण 125 करोड़ रुपए बच गए।

यह कर्ज इन किसानों को बंटने से पहले ही उसका भंड़ाफोड़ हो गया, जिसके चलते सहकारिता विभाग की कार्यशैली उजागर हो गई।

जानकारी के अनुसार इन 50 हजार से ज्यादा फर्जी कृषकों के ऋण आवेदन पत्रों को स्वीकृत कर दिया गया था, लेकिन ऋण उनके खातों में ड़ालने से पहले मामला खुल गया।

अब सहकारिता विभाग के उन कर्मचारियों, अधिकारियों पर गाज गिरने जा रही है, जिन्होंने इन ऋण पत्रों की जांच की और उनकी स्वीकृति दी थी।

गौरतलब है कि बीते साल राज्य सरकार द्वारा किसानों के कर्जे माफ करने के वक्त भी फर्जी ऋण माफ होने के मामले उजागर हो चुके हैं।

सहाकारिता विभाग में इस प्रकरण की जांच शुरू हो चुकी है और कई बड़े अधिकारियों के भी लपेटे में आने की संभावना है। विभाग के रजिस्ट्रार नीरज के पवन हैं।