BJP कहती है 44 लाख नौकरियां दे दीं, दीं तो 2.70 लाख हैं, 1.63 लाख तो अटकी पड़ी हैं-

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उपेन यादव@जयपुर।

राजस्थान में विधानसभा चुनाव सिर पर है, और ऐसे वक्त में राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने हिसाब से घोषणा पत्र बनाने में जुटी हुई हैं। सम्भवना है कि अगले 2-3 दिन में दोनों ही प्रमुख दलों के घोषणा पत्र सामने आ जाएंगे।

एक तरफ प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अपना ताजा घोषणा पत्र बनाने के लिए घोषणा पत्र समिति का गठन कर चुकी है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने भी घोषणा पत्र जारी करने से पहले जनता से राय मांगी है।

बीजेपी ने दावा किया है कि साल 2013 में उनके द्वारा जारी किया गया घोषणा-पत्र, उसमें से सभी वादे पूरे कर दिए गए हैं। सरकारी नौकरियों की बात करें, तो जितना वादा किया गया था, उससे कई गुना ज्यादा दे दी गई है।

इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने टि्वटर हैंडल पर ट्वीट करके बताया है कि राजस्थान में बीते 5 साल के दौरान पार्टी ने सत्ता में रहते हुए और देश के 44 लाख बेरोजगारों को नौकरी दी हैं।

भले ही भारतीय जनता पार्टी ने अपने दावे में सम्मानित लाख बताए हों, लेकिन पिछले दिनों बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बिरला ऑडिटोरियम में शक्ति केंद्रों के प्रमुखों सहित बीजेपी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बताया था कि राजस्थान सरकार अब तक 26 लाख लोगों को रोजगार दे चुकी है।

दूसरी तरफ खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मदन लाल सैनी दावा करते हैं कि प्रदेश में 35 लाख लोगों को नौकरी दी जा चुकी है। समझ नहीं आ रहा कि भाजपा सच बोल रही है, वसुंधरा राजे या अमित शाह सच बोल रहे हैं?

लेकिन असलियत यह है कि प्रदेश में 5 साल के दौरान राजस्थान सरकार ने करीब 2. 70 लाख युवाओं को ही सरकारी नौकरी दी जा सकी है। यह आंकड़ा भी सरकारी ही है। सरकार के विभिन्न विभागों में दी गई नियुक्तियों के बाद यह आंकड़ा सामने आया है।

यह है सरकारी नौकरी का आंकड़ा, जो बीजेपी सरकार दे चुकी हैं-

-राजस्थान पुलिस कांस्टेबल 2018 में 13000 पदों पर।

-सेकंड ग्रेड साल 2016 में 9000 पदों पर।

-फर्स्ट ग्रेड वर्ष 2015 में 13000 पदों पर।

-रीट शिक्षक भर्ती 2016 में 16000 पदों पर।

-4400 पदों पर पटवारी भर्ती 2015 में।

-4000 पदों पर ग्राम सेवक भर्ती 2015 में।

ऐसा नहीं है कि कांग्रेस पार्टी कोई दूध की धुली हुई है, बल्कि कांग्रेसी शासन के दौरान साल 2012 और साल 2013 में जितनी भी सरकारी नौकरियां निकाली गई थीं, उनमें से करीब 90 फ़ीसदी पर नियुक्ति हुई ही नहीं। कुछ नियुक्तियां तो तब से लेकर अब तक लटक रही हैं।

दोनों पार्टियों का फोकस प्रदेश के करीब 74 लाख उन वोटर्स पर है, जो पहली बार वोट देने जा रहे हैं। ऐसे में पार्टियां इन नए वोटर्स को अपने पक्ष में करने के लिए सरकारी नौकरियों के बड़े-बड़े वादे करने जा रही है।

सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा 5 साल में जहां 44 लाख को सरकारी नौकरी देने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस पार्टी प्रदेश के बेरोजगारों को 3500 महीना बेरोजगारी भत्ता देने का पहले ही वादा कर चुकी है।

ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि प्रदेश में 1.62 लाख सरकारी नौकरियां लटकी हुई हैं।

प्रदेश में इतनी भर्तियां अभी भी लटकी हुई हैं-

-3300 विद्यालय सहायक भर्ती सुप्रीम कोर्ट में 2013 से लंबित है।

-9000 के करीब पंचायत राज एलडीसी भर्ती 2013 से लंबित है।

-12000 से ज्यादा पदों पर 2013 की नर्सिंग भर्ती लंबित है।

-6500 पर नर्सिंग भर्ती 2018 लंबित है।

-26000 रीट शिक्षक भर्ती 2018 की लंबित है।

-2016 18 साइंस मैथ की 7000 पदों पर रीट शिक्षक भर्ती लंबित है।

-11255 एलडीसी भर्ती 2018 का परिणाम भी जारी नहीं हुआ, लंबित है।

-571 पदों पर संस्कृत बाकी रीट लेवल 2 नियुक्ति प्रक्रिया लंबित है।

-917 पदों पर आरपीएससी एलडीसी भर्ती की पिक अप लिस्ट के चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया लंबित है।

-331 पदों पर 2016 एसआई भर्ती की भर्ती प्रक्रिया लंबित है।

-4913 एसएसआर भर्ती पंचायत राजस्थान एलडीसी 2013 से लंबित है।

(नोट-आंकड़ों के लिए लेखक खुद जिम्मेदार हैं)

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