beniwal in bjp office with bjp leaders
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जयपुर।
आज का दिन राजस्थान की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिन साबित होने जा रहा है। राज्य के दो बड़े राजनीतिक धड़े, या यूं कहें कि दो सियासी ध्रुव एक होने जा रहे हैं।

पिछले साल विधानसभा चुनाव से ठीक 20 दिन पहले अपना राजनीतिक दल बनाकर चुनावी समर में उतरे फायर ब्रांड नेता हनुमान बेनीवाल और उनकी पार्टी, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के भाजपा में गठबंधन होने की संभावना है।

सूत्रों का दावा है कि हनुमान बेनीवाल अपने समर्थकों और अन्य दोनों विधायकों के साथ भाजपा के एनडीए का हिस्सा हो जाएंगे। इसके साथ ही यह भी चर्चाएं हैं कि आरएलपी की ओर से खुद बेनीवाल नागौर से चुनाव लड़ेंगे।

भाजपा सूत्रों की मानें तो केंद्रीय मंत्री और लोकसभा चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर और हनुमान बेनीवाल के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है, और इसीलिए भाजपा के नागौर समेत 6 टिकट घोषित नहीं किए गए हैं।

यह भी संभावना जताई जा रही है कि नागौर से भाजपा अपने टिकट पर हनुमान बेनीवाल को लोकसभा का चुनाव लड़वा दे, या फिर आरएलपी के साथ गठबंधन कर बेनीवाल को आरएलपी के टिकट पर नागौर की सीट दे दी जाए।

हालांकि, अभी तक किसी भी पदाधिकारी पुष्टि नहीं की है। दोनों ही दलों के पदाधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। ठीक दस बजे भाजपा मुख्यालय पर ‘महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता’ का आयोजन किया गया है, जिस वक्त सारी बातों के सामने आने की उम्मीद है।

आपको बता दें कि बीते दिनों आरएलपी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर वार्ता हुई थी, जिसमें बेनीवाल ने 7 सीटों की मांग की थी। कांग्रेस ने उनको केवल अजमेर की सीट देने की बात कही, जिसपर बात नहीं बनी।

सूत्रों का कहना है कि उसके बाद ही से बेनीवाल और भाजपा के बीच वार्ताओं का दौर जारी है। इस दौरान जावड़ेकर और बेनीवाल के बीच कई गुप्त वार्ताएं हो चुकी हैं।

आपको याद दिला दें ​की बीते दिनों राहुल गांधी की रामलीला मैदान में सभा के दौरान घनश्याम तिवाड़ी ने कांग्रेस का दामन थामा था। तिवाड़ी कभी बीजेपी के कद्दावर नेता हुआ करते थे।

साल 2018 के शुरुआत में 9 साल बाद भाजपा पूर्व विधायक किरोड़ीलाल मीणा फिर से भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उनको राज्यसभा में भेजा जा चुका है। मीणा भी वसुंधरा राजे से नाराजगी के चलते 2009 में भाजपा से अलग हो गए थे।

हनुमान बेनीवाल ने सबसे पहले 2003 में विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद 2008 में बेनीवाल ने भाजपा के टिकट पर खींवसर से चुनाव लड़कर सदन पहुंचे थे। लेकिन 2009 में उनकी वसुंधरा राजे से सियासी खटास के बाद पार्टी ने निलंबित कर दिया था।

भाजपा से अलग हुए घनश्याम तिवाड़ी, किरोडीलाल मीणा और हनुमान बेनीवाल वसुंधरा राजे से मनमुटाव के बाद ही अलग हुए थे। वसुंधरा राजे के भाजपा की राज्य इकाई में आने के बाद लंबे समय तक राज्य में यह सियासी खेल जारी है।