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जयपुर।

राजधानी पिंकसिटी से निकला जीका वायरस का तूफान अब पूरी दुनिया में फैल चुका है। लेकिन जिस वायरस को लेकर हो हल्ला किया जा रहा है, उसके पीछे का सच काफी ड़रावना है।

चिकित्सा विभाग कहता है कि अरब देशों में कामगार जाते हैं, वहां से वायरस लेकर आ जाते हैं। एक दिन पहले चिकित्सा अधिकारियों ने एक व्यक्ति के बिहार जाने और वहां से जीका वायरस लेकर आने का बयान दिया।

लेकिन उससे पहले बुधवार को कहा गया था कि एक कामगार अरब देश गया था, सबसे पहले उसी के जीका वायरस पॉजिटिव के रुप में देखा था।

एक ओर जहां पूरा चिकित्सा महकमा अब जी जान से जुटा हुआ है। डॉक्टरों की छुट्टियां निरस्त कर दी गई हैं, वहीं सबसे बड़ी लापरवाही नगर निगम की सामने आई है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाके में कए साल से मच्छर मारने के लिए न फोगिंग हुई और न ही स्प्रे किया गया। पिछले साल निगम के लोग आए थे, जो रस्म अदायगी की तरह कुछ जगह फोगिंग करके चले गए।

बताते हैं यहां पर अधिकांश गलियां कंजस्टेड होने के कारण निगम की गाड़ियां आगे जाती ही नहीं है, और निगम के कर्मचारी पैदल चलकर छिड़काव करने से बचते हैं।

यहां पर बीते 18-20 साल से रह रहे निजाम बताते हैं कि सबसे बड़ी समस्या यहां लोगों का घनत्व है, जिसके कारण निगम के लोग आगे नहीं जाते। हर साल यहां पर डेंगु, मलेरिया के खूब मामले निकलते हैं।

जिस मरीज के पहले जीका शिकार होने का दावा किया जा रहा था, अब चिकित्सा महकमे के अधिकारी उसके बारे में जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।

इधर, महकमे के मंत्री कालीचरण सराफ एक दिन पहले ही इलाके का दौरा करके लौटे हैं। सराफ ने दावा किया है कि किसी भी सूरत में उपचार में लापरवाही या निगम की तरफ से फोगिंग में कमी नहीं आने दी जाएगी।

अब हमारी टीम लौटी सचिवालय की तरफ। वही जगह, जहां पर सरकार के मंत्री और जिम्मेदार अधिकारी बिराजते हैं। सबसे पहले चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ के कक्ष में घुसे।

समय था करीब 2.35 मिनट। मंत्री मौजूद नहीं थे। कर्मचारियों ने बताया कि आए ही नहीं हैं। मंत्री के कक्ष और उनके निजी सचिव के कक्ष में मच्छर मारने के रैकेट पड़े हैं, कमरों में मास्कीटो रिफील लगे हुए हैं।

इसके बाद हमारी टीम पहुंची पंचायती राजमंत्री राजें सिंह राठौड़ के कक्ष में। राठौड़ वही मंत्री हैं, जिन्होंने यह महकमा सरकार के आधे समय संभाला है।

मंत्री यहां पर भी नहीं मिले, लेकिन मच्छर मारने की पूरी सुविधा यहां भी मौजूद है। वासुदेव देवनानी, प्रभुलाल सैनी समेत अधिकांश मंत्रियों के कमरों में रैकेट और मॉस्कीटो रिफील लगे हुए हैं।

सरकार ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ शिक्षण संस्था प्रधान को भी दिशा-निर्देश दिये हैं। कहा गया है कि अपने शिक्षण संस्थन की पेयजल टंकियों की तत्काल सफाई कराएं, संस्थान में कहीं पानी एकत्रित नहीं होने दें।

दैनिक प्रार्थना में विद्यार्थियों को जीका, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया की जानकारी दें, छात्रों को मच्छर के प्रजनन की रोकथाम के लिए जागरुक करें और बुखर से ग्रसित छात्रों के परिजनों को तुरंत सूचना दें और उनकी जांच-उपचार करवाएं।

आंख का आना, बुखार आना, शरीर पर दाने होना, बदन दर्द होना और जोड़ों का दर्द होना। सामान्यत: यह लक्षण डेंगू-मलेरिया की तरह ही होते हैं, लेकिन मच्छर के द्वारा जीका का वायरस फैलाया जाता है।

गर्भवती महिलाएं नियमित रूप से स्वास्थ्य परिक्षण करवाएं। पति-पत्नी में से अगर कोई जीका रोग से ग्रसित पाया जाता है, तो साथी से अगले 6 माह तक सुरक्षित, यानी कंडोम से ही योन संबंध बनाएं।

कीटनाशक से उपचारित, मच्छरदानी, मच्छर-रोधी, बत्ती, क्रीम का प्रयोग करें। रक्तदान से पहले डोनर की जीका जांच अवश्य करवाएं।

जीका रोगी अत्यधिक पानी का सेवन करें। पूरी बांह के कपड़े पहनें। बुखार आने पर अपने नजदीकी अस्पताल में परामर्श लेवें।

सप्ताह में एक बार कूलर, परिंडे, फूलदान, पानी की टंकी और फ्रीज की ट्रे आदि को साफ पानी से धोकर, सुखाकर भरें। जीका रोगी तीन सप्ताह तक यात्रा नहीं करें।

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