सरपंच ने सरकारी राशि से निजी भूमि में बनाई पानी की टंकियां

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—संभागीय आयुक्त ने सरपंच को थमाया आरोप पत्र

जयपुर।
सरकार आमजन के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर उनमें लाखों रुपए खर्च करती है, ताकि आमजन की समस्याओं का समाधान हो सकें और उनका सार्वजनिक उपयोग हो।

लेकिन सरकारी तंत्र में बैठे जिम्मेदार लोग हितों को साधने के लिए पद एवं सरकारी राशि का दुरुपयोग करते हैं। इसका खामियाजा जनता को उठाना पड़ता है।

ऐसे में जनता की परेशानी कम होने की बजाय बढ़ती जाती है। ताजा मामला जालसू पंचायत समिति की ग्राम पंचायत खोराश्यामदास में आया है।

यहां सरपंच एवं ग्राम विकास अधिकारी ने सरकारी राशि से अपने चहेते लोगों को अनुचित लाभ पहुचाकर उनकी निजी खातेदारी की भूमि में सरकारी पानी की टंकियों का निर्माण करने का आरोप है।

सरपंच और सचिव ने नियमों को दरकिनार कर राजकोष से राशि का भुगतान प्राप्त कर नियम विरुद्ध निजी खातेदारी की भूमि में एक के बाद एक 28 टंकियों का निर्माण करा दिया है।

शिकायत की जांच में दोषी पाए जाने पर संभागीय आयुक्त टी रविकांत के सरपंच कविता पर कार्रवाई कर पंचायतीराज एक्ट की धारा 38 एवं 39 के तहत आरोप पत्र जारी कर एक महीने में जवाब मांगा है।

ग्राम विकास अधिकारी प्रवीण कुमार जैन को भी मामलें में दोषी मानकर जिला परिषद प्रशासन ने सीसीए नियम 16 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार स्थानीय ग्रामीणों ने विधानसभा की जनलेखा समिति के समक्ष सरपंच कविता के खिलाफ निर्माण कार्यों में अनियमितता एवं भ्र्ष्टाचार की शिकायत दर्ज कराकर जांच की मांग की थी।

जनलेखा समिति ने पंचायतीराज विभाग ने संभागीय आयुक्त के माध्यम से शिकायत की जांच करा कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच के लिए पंचायत समिति स्तर पर जांच कमेटी गठित की।

कमेटी ने शिकायत के बिंदुओ का ग्राम पंचायत एवं राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार मौके पर जाकर जांच की। जांच में शिकायत के अनुसार 28 टंकियों का निर्माण निजी खातेदारी की भूमि में पाया गया है।

पद एवं सरकारी राशि के दुरुपयोग करने पर सरपंच कविता एवं ग्राम विकास अधिकारी प्रवीण जैन को दोषी मानते हुए विभाग ने कार्रवाई शुरू की है।

राजकोष से करीब 20 लाख रुपए की राशि खर्च कर डाली

सरपंच कविता ने अपने लोगों को फायदा देने के लिए निजी खातेदारी की नियम विरुद्ध 28 टंकियां बना दी है, उनके लिए 20 लाख रुपए की राशि खर्च कर डाली है।

विभाग के नियम के मुताबिक भूमि का राजहित में सार्वजनिक उपयोग के लिए रजिस्टर्ड दानपत्र करवाए बिना निजी खातेदारी की भूमि में सरकारी राशि से निर्माण नही करवाए जा सकते है।

उच्च न्यायालय के एडवोकेट संदीप कलवानिया ने बताया कि पंचायती राज की धारा 38 में सरपंच के कर्तव्यों के निर्वहन में अपचार एवं अपकीर्तिकर आचरण का दोषी पाए जाने पर राज्य सरकार के अनुमोदन पश्चात पद से हटाया जा सकता है।

एडवोकेट कलवानिया ने बताया कि ऐसे मामलों में पद से हटाने से पहले आरोपी जनप्रतिनिधि को आरोपों के संदर्भ में सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिए जाने का प्रावधान है।