टाटा के पास ही रहेगा ताज

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- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

नई दिल्ली।
दिल्ली का मशहूर होटल ताज मानसिंह पर आगे भी टाटा समूह की इंडियन होटल्स कंपनी का नियंत्रण बरकरार रहेगा। देशभर की सभी ताज ब्रांड की होटलों का संचालन करने वाली टाटा को 33 साल और चलाने का पट्टा मिल गया है।

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद द्वारा शुक्रवार को कराई गई ई-नीलामी में टाटा ने आईटीसी को पछाड़ते हुए ताज होटल ग्रुप्स पर कब्जा बरकरार रखा है।

नीलामी के परिणाम की घोषणा शेयर बाजार में कारोबार बंद होने के बाद की गई, किंतु ऐसा लगता है कि टाटा की इस कंपनी के शेयर की कीमत की भी कंपनी की जीत में खासी भूमिका रही है।

मुम्बई स्टॉक एक्सचेंज में इस कंपनी का शेयर व्यापार के दौरान 7 प्रतिशत तक चढ़ा, लेकिन बाद में पांच फीसदी बढ़त के साथ 135.45 रुपये पर बंद हो गया।
इस निलामी के बाद ईआईएच के अलावा लेमन ट्री जैसी होटल कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।

टाटा की कंपनी आईएचसीएल ने लाइसेंस शुल्क के रूप में हर माह 7.03 करोड़ रुपए, यानी होटल के रेवेन्यु का 32.5 प्रतिशत एनडीएमसी को देने पर सहमति बनी है।

अब से पहले तक प्रति माह केवल 3.94 करोड़ रुपये चुका रही थी। ताज होटल टाटा वाली आईएचसीएल की एक अहम संपत्ति है। वित्त वर्ष 2017 में कंपनी का राजस्व 2.2 अरब रुपए रहा थ।

ताज होटल की नीलामी के बाद कंपनी 40 साल पुराने इस होटल को नए सिरे से संवारने के लिए निवेश करने के लिए योग्य होगी।

ताज होटल के भविष्य किसी अन्य के पास जाने की संभावना के कारण अभी तक कंपनी इसमें बड़ा निवेश करने से बच रही थी। आईएचसीएल के सीएमडी पुनीत चटवाल ने खुशी जताते हुए कहा है कि ताज महल होटल कंपनी का अहम हिस्सा बना रहेगा। हम होटल में और अधिक निवेश करेंगे, इसे भारतीय आतिथ्य क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

टाटा ने ताज मानसिंह होटल को पट्टे पर लेने के लिए एनडीएमसी के साथ साल 1976 में करार किया था। उसके दो वर्ष बाद 292 कमरों का यह भव्य होटल शुरू किया गया था। कंपनी को पहले मिला हुआ 33 साल का पट्टा 2011 में खत्म हो गया था।

जब एनडीएमसी ने ताज होटल की नीलामी करने का निर्णय किया तो आईएचसीएल ने इसको दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

होटल की कई बार पट्टे की समय सीमा बढ़ाए जाने के उपरांत शीर्ष न्यायालय ने इसी साल अप्रैल में इसकी नीलामी को मंजूरी दे दी थी।