विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान बना ‘हड़तालिस्तान’

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- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

जयपुर।

नवंबर दिसंबर में होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले पूरा राजस्थान हड़तालिस्थान बन चुका है। रोडवेज के सारे कर्मचारी 18 दिन से हड़ताल पर बैठे हैं, मंत्रालय कर्मचारी हड़ताल कर रहे हैं।

अनेक विभागों में हड़ताल चल रही है, जेसीटीएसएल के तमाम कर्मचारी धरने पर बैठे हुए हैं। अब ताजा प्रकरण राजस्थान सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने का जिम्मा संभाले सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक से लेकर एपीआरओ तक हड़ताल पर चले गए हैं।

राजस्थान की साढे 4500 बसों के पहिए 18 दिन से थमे हुए हैं। इस विभाग के 22000 कर्मचारी 18 दिन से धरने पर बैठे हुए हैं कुछ कर्मचारियों ने बीच में अनशन भी किया इसी विभाग से रिटायर हुए एक कर्मचारी ने 2 दिन पहले ही ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान दे दी थी।

इसी तरह से राजस्थान सरकार के सबसे अधिक प्रभावित करने वाले मंत्रालय कर्मचारी भी धरने पर बैठे हुई है। 17 हज़ार से ज्यादा मंत्रालय कर्मचारी मानसरोवर में टेंट लगाए बैठे हैं। सरकार की तरफ से कई बार रोडवेज कर्मियों और मंत्रालय कर्मचारियों के साथ हड़ताल तोड़ने को लेकर वार्ता का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन सभी कर्मचारी अपनी मांगे माने जाने तक कार्य बहिष्कार को खत्म करने को राजी नहीं हुए हैं।

राजस्थान के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर इस मामले में पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि राजस्थान की मुख्यमंत्री किस बात पर राजस्थान गौरव यात्रा निकाल रही हैं? सरकार किस बात पर गर्व कर रही है? जब सरकार के तमाम विभागों में हड़ताल चल रही है?

गौरतलब है कि 10-12 अक्टूबर तक राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लगने की संभावना है। ऐसे में सभी कर्मचारी संगठन राज्य सरकार से अंतिम दिनों में लाभ लेने के लिए यह हड़ताल कर रहे हैं, जबकि सरकार ने रोडवेज को स्पष्ट कर दिया है कि अतिरिक्त हर महा 45 करोड रुपए का घाटा भार वहन करने की स्थिति में नहीं है। कहीं पर सातवें वेतन आयोग, कहीं पर सेवानिवृत्ति के बाद रुकी हुई भुगतान, कहीं पर अन्य सुविधाओं को बढ़ाने के लिए और कहीं पर वेतन आयोग की सिफारिशें ठीक से लागू करने के लिए यह हड़ताल की जा रही है।

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