JNUV: छात्रसंघ अध्यक्ष सुनिल चौधरी की सुनवाई कर रहे कुलपति की नियुक्ति अवैधानिक एवं दूषित!

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dr. rajvendra chaudhary jaipur-hospital

जोधपुर।
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर पिछले कई सालों से कभी शिक्षक भर्ती महाघोटाला तो कभी कुलपति की नियुक्ति तथा उनके कारनामों के मुद्दे पर चर्चा में रहा है।
ताजा मामला  कुलपति पद पर प्रो. गुलाबसिंह चौहान की नियुक्ति को लेकर है, जिसको लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रो. चौहान की कुलपति पद पर नियुक्ति होने पर सवाल खड़े करते हुए जेएनवीयू शिक्षक भर्ती संघर्ष समिति ने इस नियुक्ति को अवैधानिक एवं दूषित बताया हैं।
जेएनवीयू शिक्षक भर्ती संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश भाटी ने बताया कि कुलपति सर्च कमेटी का गठन ही दूषित हैं।
वकील भाटी ने बताया कि जय नारायण व्यास विवि, जोधपुर 1962 के एक्ट की धारा 11 (कुलपति) में वर्ष 2017 में विधानसभा के द्वारा संशोधन किया गया था।
संशोधन के पश्चात जेएनवीयू एक्ट 1962 की धारा 11 (4) के अनुसार “जो व्यक्ति विवि व इसके कॉलेजों से सम्बंधित नहीं हैं, वहीं व्यक्ति कुलपति सर्च कमेटी का सदस्य बनने का पात्र होगा।”
इस आधार पर मत्स्य विवि के कुलपति डॉ. भारतसिंह सर्च कमेटी के सदस्य हो ही नहीं सकते। क्योंकि पूर्व कुलपति डॉ. रामपाल सिंह के कार्यकाल में इनको जेएनवीयू सिंडिकेट का सदस्य बनाया गया था और यह वर्तमान में भी सिंडिकेट के सदस्य हैं।
डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि इस प्रकार से ये विश्वविद्यालय से संबंधित व्यक्ति हैं और सर्च कमेटी के सदस्य के रूप में पात्र व्यक्ति नहीं हैं।
कुलपति चयन की धारा भी अवैधानिक
जेएनवीयू एक्ट 1962 की धारा 11 में यूजीसी रेगुलेशन-2010 की धारा- 7.3.0(1) के अनुसार संशोधन ही नहीं किया गया, जो कि अनिवार्य था।
इसमें उच्च स्तर की क्षमता, सत्यनिष्ठा, नैतिकता और संस्थान के प्रति प्रतिबद्धता जैसे उच्च स्तर के गुणों को संशोधन के समय उक्त धारा के साथ जाना चाहिए था।
उक्त योग्यताओं को नहीं जोड़ने के कारण ही 03 अक्टूबर को उच्च न्यायालय जोधपुर ने राज्य सरकार को इस सम्बंध में दिशा-निर्देश जारी किए।
परन्तु सरकार ने कोर्ट के निर्देशों की परवाह किये बिना ही दो कुलपतियों की नियुक्ति कर दी।
राजभवन व सरकार के साथ धोखाधड़ी करने में शामिल
संघर्ष समिति के डॉ. श्रवण कुमार डऊकिया ने बताया कि जेएनवीयू में वर्ष 2012-13 में “शिक्षक भर्ती महाघोटाला” करते समय राजभवन व सरकार को “जेएनवीयू ऑर्डिनेंस-317” के मुद्दे पर गुमराह व भ्रमित करके धोखाधड़ी करने वालों में से एक प्रमुख व्यक्ति प्रो. गुलाबसिंह चौहान भी थे।
इनके द्वारा प्रोफेसर पद पर तथा प्रभावशाली अकादमिक कौंसिल सदस्य रहते हुए यूजीसी नियमों के विरुद्ध अवैधानिक प्रस्ताव रखा तथा अपने प्रभाव का अनुचित प्रयोग करके अवैधानिक अध्यादेश को षड्यंत्र रचते हुए पारित करवाया।
डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि यही अवैधानिक अध्यादेश-317 शिक्षक भर्ती महाघोटाला का प्रमुख आधार बना। एसीबी ने इनसे भी पूछताछ की थी।
सम्भवतः एसीबी इनके खिलाफ भी चालान पेश कर सकती हैं।
 जेएनवीयू शिक्षक भर्ती संघर्ष समिति के सचिव डॉ. देवेंद्र कुमार सोलंकी ने बताया कि अवैधानिक ऑर्डिनेंस-317 व 317(4) के कारण ही ये महाघोटाला हुआ था। राजभवन तथा राज्य सरकार के साथ धोखाधड़ी करने वाले रैकेट के सदस्य व सहभागी प्रो. चौहान कुलपति पद के लिए सर्वमान्य, निष्पक्ष, शिक्षाविद व उच्च नैतिकता वाले व्यक्ति हो ही नहीं सकते हैं।
राजकार्य में बाधा उत्पन्न की
इस महाघोटाले के आरोपियों की गिरफ्तारी के समय इन्होंने राजकार्य में बाधा डालते हुये एक आरोपी को भागने में मदद की थी, परन्तु फिर भी एसीबी ने उस आरोपी को पकड़ लिया था। जिसके प्रत्यक्ष गवाह संघर्ष समिति के सदस्य है।
यूजीसी नियमानुसार योग्य नहीं
प्रो. गुलाबसिंह चौहान यूजीसी अध्यादेशों के अनुसार किसी भी विवि के कुलपति पद के चयन हेतु योग्यता नहीं रखते हैं।
यूजीसी रेगुलेशन-2010 की धारा- 7.3.0(1) के अनुसार उच्च स्तर की क्षमता, सत्यनिष्ठा, नैतिकता और संस्थान के प्रति प्रतिबद्धता जैसे उच्च स्तर के गुण प्रो. गुलाबसिंह चौहान के पास नहीं है
प्रोफेसर पद पर प्रमोशन विवादों में
प्रो. चौहान का प्रोफेसर पद पर प्रमोशन भी विवादों में रहा है। जिसकी भी निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए।
संघर्ष समिति के सचिव डॉ. देवेन्द्र कुमार सोलंकी ने बताया कि लगभग  62 शिक्षाविदों ने जेएनवीयू के कुलपति पद हेतु आवेदन किया था।
क्या उनमें से कोई भी प्रो. गुलाबसिंह चौहान से उच्च योग्यता वाला व्यक्ति सर्च कमेटी को नहीं दिखा? यह भी सर्च कमेटी की निष्पक्षता, उद्देश्य तथा मनःस्थिति पर सवाल खड़े करता हैं।