अधिकारों को लेकर राजस्थान पुलिस महकमे में ठनी

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- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

जयपुर।

अपने-अपने अधिकारों को लेकर अक्सर राजनीतिक दल और सियासी लोग चर्चा में रहते हैं। लेकिन ऐसे मौके कम ही आते हैं, जब आईएएस-आईपीएस अधिकार लिए बैठे लोग भी अपने अधिकारों को लेकर लड़ते हुए नजर आते हैं। ऐसा ही एक मामला इन दिनों चर्चा में बना हुआ है, प्रकरण है राजस्थान पुलिस का।

यह अजब-गजब लड़ाई है कानूून के जानकारों की, और लड़ाई भी है कानूनी। लड़ाई जब कानून के जानकारों की लड़ाई हो, तो फिर उसका मुकाबला भी रोचक होता है। यह मुकाबला भी अब रोचक स्थिति में पहुंच चुका है।

मामला राजस्थान पुलिस के मुखिया डीजीपी ओपी गलहोत्रा, राजस्थान पुलिस की एक चर्चित आईपीएस पंकज चौधरी और उसमें अब एंटर हो चुके शिप्रापथ थाना अधिकारी सुरेंद्र यादव के बीच का है।
उल्लेखनीय है कि आईपीएस पंकज चौधरी की सास शशि दत्ता और एक अन्य पार्टी के बीच हनुमानगढ़ जिले में एक मकान पर कब्जे को लेकर विवाद चल रहा है। उस विवाद को लेकर कोर्ट के द्वारा आईपीएस चौधरी की पत्नी मुकुल चौधरी उनकी सास ससुर दत्ता को कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
शशी दत्ता की उम्र 60 साल से ऊपर है कानून के जानकार आईपीएस पंकज चौधरी बताते हैं कि कानूनन किसी भी 60 साल से ऊपर के व्यक्ति को पूछताछ के लिए पुलिस थाने में नहीं बुला सकती, उसके लिए पुलिस के अधिकारियों को संबंधित आरोपी के घर पर ही पूछताछ के लिए जाना पड़ता है।
लेकिन हनुमानगढ़ पुलिस में शशि दत्ता को थाने में हाजिरी देने को कहा जिसको लेकर पंकज चौधरी गुस्सा हो गए और उन्होंने संबंधित एडिशनल एसपी वीरेंद्र जाखड़ के खिलाफ शिप्रा पथ थाने में एक परिवार स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेज दिया।
मजेदार बात यह है की पंकज चौधरी ने ना केवल सुरेंद्र जाखड़ के खिलाफ मामला दायर करने को कहा, बल्कि साथ ही साथ राजस्थान पुलिस की मुखिया ओ पी गलहोत्रा को भी इस मामले में आरोपी बना दिया।
स्पीड पोस्ट से परिवाद दायर करने के लिए भेजे गए शिकायती पत्र को शिप्रापथ थाना अधिकारी सुरेंद्र यादव जहां मिलने से इंकार कर रहे हैं, वहीं पर आईपीएस चौधरी ने कहा है कि इस तरह के मामले में मुकदमा दर्ज नहीं करना भी एक अपराध है।
अब यह प्रकरण त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है। एक तरफ राजस्थान पुलिस के आला अधिकारी ओपी गलहोत्रा हैं, दूसरी ओर सुरेंद्र जाखड़ और तीसरी तरफ आईपीएस पंकज चौधरी हैं। देखना रोचक होगा कि इन तीनों पक्षों में से कौन, किसपर, कब और कैसे भारी पड़ता है?

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