RSS को साइडलाइन करने के लिए BJP ने विकसित किया यह तंत्र—

30
nationaldunia
- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

जयपुर।

बरसों से आरएसएस के सहारे चल रही भाजपा अब उसकी छाया से बाहर आने के लिए छटपटाने लगी है। भाजपा ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव जीतने के लिए आरएसएस की तर्ज पर अपने संगठन का गठन किया है।

यह बात सही है कि आज भी भाजपा को चुनाव जीतने के लिए आरएसएस की ही शरण में जाना पड़ता है। अपने स्वतंत्र को मजबूत तरीके से चलाने में माहिर संघ के संगठन का लोहा हर कोई मानता है।

इसके लिए पार्टी ने अपने विचार संगठन, संघ की पूरी संगठनात्मक रुप रेखा को फॉलो किया है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव ही नहीं, बल्कि अपने लक्ष्यों को हासिल के मामले में संघ अपने जमीनी स्तर के संगठनों के द्वारा कार्य करने में माहिर है।

संघ की इसी विशेषता के कारण यह संगठन आज विश्व का सबसे बडा स्वयंसेवी संगठन बन गया है। विश्व की सबसे बडी राजनीतिक पार्टी बन चुकी भाजपा भी आरएसएस के रास्ते पर चल पड़ी है।

भारतीय जनता पार्टी भी अब आरएसएस के संगठनात्मक ढांचे, विस्तारक और प्रवास को अपना चुकी है। चुनाव की व्यूहरचना भी आरएसएस के संगठनात्मक के ढांचे के आधार पर करने जा रही है।

आरएसएस में 9 स्तरीय संगठनात्मक ढांचा होता है। आरएसएस की सबसे छोटी इकाई गट होती है। संघ में आमतौर पर 2 से ढाई हजार की आबादी पर एक गट बनाया जाता है।

गट के ऊपर बस्ती इकाई होती है। चार गट मिलाकर एक बस्ती की रचना की जाती है। इसके बाद करीब 50 हजार की आबादी पर मंडल का गठन होता है। मंडल के ऊपर नगर होता है।

एक नगर इकाई में एक लाख की आबादी समाहित होती है। 9 स्तरीय संगठनात्मक ढाचा में नगर के बाद जिला, विभाग, प्रांत, क्षेत्र और अखिल भारतीय इकाई कार्यरत है।

आरएसएस में बरसों से गट, बस्ती, मंडल और नगर इकाई हैं। संघ की सरंचना में गट 2-3 हजार, बस्ती 10 हजार, बस्ती-4-5 हजार, नगर एक लाख, जिला, विभाग, प्रांत, क्षेत्र, राष्ट्रीय है।

भाजपा पिछले चार साल से आरएसएस की तरह संगठन का ढांचा खडा कर रही है। भाजपा ने सबसे पहले बडी इकाई को तोड कर छोटा किया है।

साथ ही बूथ समिति के रूप में अपनी सबसे छोटी इकाई खडी की है। पहले भाजपा में सबसे छोटी इकाई वार्ड थी। भाजपा ने वार्ड इकाई को खत्म कर बूथ इकाई का गठन किया है।

पांच से सात बूथ इकाई के ऊपर शक्ति केंद्र का गठन किया। पहले एक विधानसभा क्षेत्र में एक मंडल होता था। एक मंडल की जगह एक विधानसभा क्षेत्र में तीन से चार मंडल बनाए हैं।

आरएसएस की तर्ज पर संगठनात्मक ढांचा बनाने के बाद भाजपा ने विस्तारक एवं प्रवास योजना लागू की है। आरएसएस के प्रचारक एवं विस्तारक की तरह भाजपा में विस्तारक बनाए गए हैं।

पार्टी नेताओं, विधायकों, मंत्रियों एवं विस्तारकों के प्रवास तय किए हैं। प्रदेश के सभी 200 विधानसभा क्षेत्र में विस्तारक तैनात किए गए हैं।

यह विस्तारक लोकसभा चुनाव तक अपना घर छोडकर आवंटित विधानसभा क्षेत्र में काम करेंगे। भाजपा ने हाल ही में आरएसएस की संगठनात्मक रचना के आधार पर अपनी चुनावी व्यूह रचना तैयार की है।

आरएसएस ने जहां संगठनातमक रूप से राजस्थान को तीन प्रांतों चितोडगढ, जयपुर और जोधपुर में बांट रख रखा है, वहीं भाजपा ने प्रान्तों में बांटकर तीन प्रांतों में अपने छह नेताओं को लगाया है।

यह नेता विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकतार्ओं से फीडबैक ले रहे हैं। आज प्रदेश के सभी 51200 बूथ पर बीजेपी की कार्यकार्यकारिणी है।

-आरएसएस की सरंचना:- गट 2-3 हजार, बस्ती 10 हजार, बस्ती-4-5 हजार, नगर एक लाख, जिला, विभाग, प्रांत, क्षेत्र, राष्ट्रीय।

-भाजपा की सरंचना:- पन्ना प्रमुख, बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल, जिला, संभाग, प्रदेश, राष्ट्रीय।