बीजेपी सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना संकट में!

26
nationaldunia
- Advertisement - dr. rajvendra chaudhary

—बीमा कंपनी ने 13 सितंबर बाद भर्ती मरीजों के भुगतान से किया इंकार, सरकार ने भी रोका कंपनी का प्रीमियम

जयपुर
भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार की बड़ी योजनाओं में शामिल भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना पर संकट के बादल घिर आए हैं। दरअसल, योजना के तहत निजी अस्पतालों को भुगतान करने वाली कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए हैं। बीमा कंपनी ने निजी अस्पतालों को मेल कर कहा कि इस योजना में 13 सितंबर के बाद से भर्ती किए जाने वाले मरीजों का भुगतान कंपनी नहीं करेगी।

इस तरह का मेल मिलने के साथ ही निजी अस्पतालों में हड़कंप मच गया और उन्होंने योजना के तहत मरीज भर्ती करना बंद कर दिए। इधर सरकार ने भी कंपनी का प्रीमियम रोक दिया है। बता दें कि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का सालाना बजट 1200 करोड रुपए है।

अधिक जानकारी के लिए अधिकारियों से संपर्क करें

कंपनी की ओर से अस्पतालों को किए गए मेल में यह भी लिखा गया कि 13 सितंबर बाद भुगतान क्यों बंद किया जा रहा है, इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए भामाशाह बीमा योजना के अधिकारियों से संपर्क करें। इधर निजी अस्पतालों द्वारा मरीज भर्ती करने से इंकार करने के बाद से अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचेमरीजों को भी बिना उपचार वापस लौटना पड रहा है। कई अस्पतालों ने तो प्राप्त मेल का हवाला देते हुए भर्ती नहीं किए जाने की जानकारी का नोटिस भी चस्पा कर दिया है।

कंपनी की प्रिमियम राशि रोकी
इधर बीमा योजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कंपनी ने निजी अस्पतालों का भुगतान गाइडलाइन की अवहेलना करते हुए रोका है। ऐसे में कंपनी की करीब 106 करोड रूपए की प्रीमियम राशि रोक ली गई है। कंपनी की मेल निजी अस्पतालों को मिलने की जानकारी मिलने के बाद चिकित्सा विभाग ने सभी अस्पतालों को उपचार जारी रखने को कहा है। संयुक्त कार्यकारी अधिकारी आशीष मोदी ने बताया कि कंपनी द्वारा अस्पतालों को भुगतान में विलंब को देखते हुए प्रीमियम राशि रोकी गई है, लेकिन विभाग ने अस्पतालों को उपचार जारी रखने को कहा है।

अस्पतालों पर भी लग चुके हैं आरोप
योजना में निजी अस्पतालों और बीमा कंपनी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। कंपनी ने अपनी ऑडिट में यह पाया था कि कई अस्पताल गलत तरीके से अनियमितता व फर्जी बिल बनाकर भुगतान उठा रहे हैं। जबकि कई अस्पतालों की जांच में पाया गया कि अस्पतालों ने योजना में सूचीबद्ध होते समय जो सुविधाएं वहां बताई थी, वो वहां है ही नहीं। कंपनी यह भी आरोप लगा चुकी है कि इस योजना में ऐसे अस्पतालों पर कार्यवाही करते ही चिकित्सा विभाग की ओर से उक्त कार्यवाही को खारिज कर दिया जाता है।